अवैध खनन के एक मामले में दायर जनहित याचिका पर हाइकोर्ट ने मंगलवार को पूरे प्रदेश में हर तरह के खनन पर चार माह तक पूरी तरह से रोक लगाने का आदेश जारी किया। कोर्ट ने पर्यावरण पर खनन के प्रभाव का आकलन करने और अगले 50 साल का ब्लू प्रिंट तैयार करने के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित करने का आदेश भी राज्य सरकार को दिया। कोर्ट ने इस समिति को चार माह में अंतरिम रिपोर्ट पेश करने और नौ माह में पूरी रिपोर्ट देने को कहा है।
अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि खनन के लिए कोई नया लाइसेंस जारी न किया जाए। उच्च अधिकार प्राप्त समिति को रिपोर्ट में पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे लोगों की जिम्मेदारी तय करने और उनके खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने की कार्यवाही करने का आदेश दिया गया है।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूूर्ति सुधांशु धूलिया की खंडपीठ ने बागेश्वर निवासी नवीन चंद्र पंत और अन्य की जनहित याचिका पर मंगलवार को फैसला सुनाया। खंडपीठ ने कहा कि उच्च स्तरीय कमेटी चार माह में एक अंतरिम रिपोर्ट खनन के संबंध में कोर्ट में पेश करेगी। इस रिपोर्ट में समिति बताएगी कि खनन की अनुमति दी जा सकती है या नहीं।
कोर्ट ने कहा कि खनन से हिमालयी क्षेत्र के पहाड़, नदियां, ग्लेशियर, तालाब और जंगल प्रदूषित हो रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि समिति खनन के फायदों और दुष्प्रभाव, राज्य में खनन जारी रखने या न रखने, तीन हजार फुट से अधिक ऊं चाई वाले क्षेत्रों और नदियों, जलधाराओं आदि में खनन की अनुमति देने आदि मसलों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। कोर्ट ने कहा है कि कमेटी नौ माह में रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे। इससे पूर्व चार माह में समिति को अंतरिम रिपोर्ट कोर्ट में देनी होगी। तब तक राज्य में खनन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।
यह होगी उच्चाधिकार प्राप्त समिति
क्या थी जनहित याचिका
याचिका में कहा गया था कि बागेश्वर के गांव सिरमौली, गडवा, अधलिया आदि में खनन माफियाओं द्वारा लीज की आड़ में अवैध खनन किया जा रहा है जिससे ग्रामीणों की भूमि, चारागाह, पेयजल स्रोत प्रदूषित हो रहें हैं। इससे जन जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस प्रकरण पर जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में भी अवैध खनन की पुष्टि की गई है। इस प्रकरण पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रख लिया था।
यह होगी उच्चाधिकार प्राप्त समिति
अध्यक्ष : वन एव पर्यावरण सचिव या अपर सचिव तक के उनके प्रतिनिधि
सदस्य : भारतीय वन अनुसंधान संस्थान देहरादून के महानिदेशक, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून के निदेशक और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया देहरादून के निदेशक।
जरूरत होने पर दो अन्य विशेषज्ञों को यह समिति सदस्य के रूप में शामिल कर सकेगी।
प्रमुख वन संरक्षक राजेंद्र महाजन इस समिति के सचिव होंगे
कुमाऊं मंडलायुक्त सैंथिल पांडियन इस समिति के नोडल अधिकारी होंगे
फैसले में खास
-कुमाऊं आयुक्त समिति के लिए अलग से बैंक खाता खुलवाएंगे और राज्य सरकार इस खाते में 50 लाख रुपए जमा कराएगी।
-कोर्ट के आदेश के बिना प्रमुख वन संरक्षक राजेंद्र महाजन और मंडलायुक्त सैंथिल पांडियन का राज्य सरकार तबादला नहीं करेगी।
-कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह हाई पावर कमेटी को सचिवालय में अलग से कमरा उपलब्ध कराएं।