Mimusops Elegy tree cure disease
औषधीय गुणों से युक्त मौलसरी के फल, फूल, छाल, पत्ते ही नहीं, बल्कि उसके बीज भी सेहत पर छाप छोड़ रहे हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि इसके पंचांग दांतों की मजबूती के लिए बेहद कारगर हैं। दंतमंजन में इसकी छाल काम आती है तो इसकी डालें टूथ ब्रश के रूप में काम आती हैं। छाल के पाउडर से दांतों को बेहद मजबूती मिलती है और पायरिया जैसी बीमारी तक दूर हो जाती है।
मौलसरी को बकुल के नाम से भी जाना जाता है। इसका वानस्पतिक नाम तो मिमूसॉप्स एलेंजी है, लेकिन इसे स्पेनिश चेरी भी कहते हैं। इसका पेड़ काफी हराभरा, घना और छायादार होता है। इसके पीले रंग के फल तो छोटे-छोटे होते हैं, लेकिन सेहत पर इसका बड़ा असर होता है। मार्च से जुलाई तक फलने वाले मौलसरी के फल में स्पैनिन और शुगर होती है।
आयुर्वेद के जानकार डाक्टर शाहिद अली बताते हैं कि मौलसरी के पंचांग आयुर्वेद औषधि के रूप में काम आते हैं। यह दांतों और मसूड़ों के लिए टॉनिक का काम करता है। यह शोभा वृक्ष तो है ही, साथ ही हृदयरोग, डायरिया और सिरदर्द आदि में भी कारगर है। मौलसरी के बीज का तेल (बकुलाद) भी औषधीय गुणों से युक्त होता है।
मौलसरी के फूल का अर्क खून को साफ करने के साथ-साथ मस्तिष्क को मजबूत करता है। मौलसरी के फूल सिर के नीचे रखकर सोने से सिरदर्द से राहत मिलती है। यह गर्भाशय की शिथिलता को भी दूर कर सकता है। इसकी छाल का पाउडर कई बीमारियों में रामबाण बताया जाता है।
अपने आवासीय परिसर में 12 साले पहले मौलसरी लगाकर उसका लाभ उठा रहे वृक्ष प्रेमी उमेश चंद्र जोशी का कहना है कि इसके फल पक्षियों को भी भाते हैं और कई महीनों तक उनका परिसर पक्षियों से गुलजार रहता है। हल्द्वानी में गिने-चुने पेड़ हैं। उनका मानना है कि ऐसे गुणकारी पौधे को अधिक से अधिक लोगों को लगाने चाहिए। मौलसरी का पौधा एफटीआई की नर्सरी से मामूली दरों पर मिलता है।