कई गांवों में बचे सिर्फ बुजुर्ग
सड़क के इंतजार में गांव या तो खाली हो चुके हैं या सिर्फ बुजुर्ग बचे हैं। पणधार में 30 परिवार थे लेकिन अब 12 ही बचे हैं। ऐसे ही कलेथ में 22 में से 10 ही परिवार रह गए हैं। रामपुर, मरगांव, सुनाऊं, पौड़ीखाल, निषणी, ढिगणी, ढमणी, कपलखील में भी ऐसी ही स्थिति है। लोगों को रोजमर्रा के सामान के लिए भी तीन किमी की खड़ी चढ़ाई तय कर खेड़ाखाल जाना पड़ता है। मरीजों को डंडी के सहारे उबड़-खाबड़ रास्ते से खांकरा लाया जाता है।
बजट के अभाव में काम नहीं हो पाया। गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए अभी दो किमी कटिंग और होनी है। इसके लिए दोबारा प्रस्ताव बनाया जाएगा।
- संजय सैनी, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग।
सड़क के इंतजार में मेरा जीवन गुजर गया। एक किलो चीनी के लिए तीन किमी खड़ी चढ़ाई नापकर खेड़ाखाल जाना पड़ता है। इसमें पूरा दिन लग जाता है। आज भी मानो हम आदिकाल में जी रहे हैं।
- आलम सिंह चौहान, उम्र 84 वर्ष, चाम्यूं गांव।
सड़क न बनने से मैं और कई और लोग परिवारों के साथ गांव से पलायन कर चुके हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंक, डाकघर जैसी मूलभूत सुविधाएं भी गांव को नसीब नहीं हो पाई हैं।
- गिरीश, मूल निवासी पौड़ीखाल