फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आपके कुत्ते को खोने से बचाएगा ये ‘चावल का दाना’

Mon, 07 Dec 2015 04:31 PM IST
चांद मोहम्मद / अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
कीमती कुत्ते के खो जाने या चोरी हो जाने पर चावलनुमा माइक्रोचिप मददगार साबित हो रही है। वर्तमान में डॉग शो की भीड़ में कुत्तों की पहचान करना मुश्किल होता है, ये विशेष माइक्रोचिप इस मुश्किल को आसान कर रही है।
विज्ञापन


चावल के दाने के आकार और चावल जैसी दिखने वाली यह माइक्रोचिप हर शो के प्रतिभागी कुत्ते की गर्दन में लगी होती है। इसकी जांच और पूरी आइडेंटिटी मिलान करने के बाद ही शो में कुत्ते को शिरकत करने का मौका दिया जाता है।

कुत्तों को खोने से बचाने और कैनेल क्लब ऑफ इंडिया के मानकों का पालन करने के लिए यह माइक्रोचिप लगाई जाती है। माइक्रोचिप में कुत्ते का नाम, मोबाइल के आईएमईआई नंबर की तर्ज पर 16 अंकों का डिजिट और मालिक का नाम-पता दर्ज होता है।
विज्ञापन


से ही मशीन के सामने कुत्ते को लाया जाता है तो तुरंत मेगाहर्ट्स पर काम करने वाली इस चिप की पूरी डिटेल स्क्रीन पर आ आती है।

माइक्रोचिप की मदद से खोजे गए 74 प्रतिशत कुत्ते
माइक्रोचिप बनने से पहले पशुओं की पहचान के लिए कान में टैग, गले में अलग रंग का पट्टा या शरीर पर एक निशान गुदवाकर की जाती थी।

यूएस में हुए एक सर्वे के अनुसार माइक्रोचिप के न आने से पहले खोए 13 प्रतिशत पालतू कुत्ते ही वापस मिल पाते थे, लेकिन चिप की मदद से ये आंकड़ा 74 प्रतिशत के पार पहुंच गया है।

कुत्ते को माइक्रोचिप लगाने के लिए इसे इंजेक्शन के माध्यम से गर्दन में लगा दिया जाता है। गर्दन में मांस ज्यादा होता है, इसलिए कोई दिक्कत नहीं होती। यह चिप पूरी उम्र चलती है।
- पंकज कन्नौजिया, माइक्रोचिप एक्सपर्ट

उत्तराखंड में डॉग फूड का सालाना कारोबार करोड़ों का

उत्तराखंड में डॉग फूड का सालाना कारोबार करोड़ों से ज्यादा का है। प्रदेश में कुत्ता पालने के शौकीन अपने कुत्तों को विदेशी डॉग फूड खिलाते हैं। डॉग पर मोटी रकम खर्च करने में उन्हें कोई संकोच नहीं है, बस उनकी सेहत बेहतर रहनी चाहिए।

रविवार को रेंजर्स ग्राउंड में आयोजित डॉग शो में करीब दो दर्जन से अधिक प्रजातियों के कुत्ते पहुंचे थे। कुत्तों के खाने के लिए विदेशी फूड के भी कई स्टॉल लगे थे। फ्रांस की रॉयल केनिन और इटली की कंपनी सिंबा के डिस्ट्रीब्यूटर परमजीत गुलरी, अनुज कुमार, एक अन्य कंपनी के फूड विक्रेता विवेक अग्रवाल ने बताया कि कुत्ता पालने के शौकीन डॉगी के खानपान के प्रति काफी सजग हैं।

उनकी सेहत को मेंटेन रखने के लिए ज्यादातर कुत्ता प्रेमी डॉगी फूड ही कुत्तों को खिलाते हैं। इन फूड्स में भरपूर मात्रा में कैलशियम, फास्फोरस, प्रोटीन आदि होता है। हर प्रजाति और उम्र के लिए अलग-अलग उत्पाद बाजार में उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि दूध, रोटी, मांस आदि एकत्र करने के झंझट के चलते लोग डॉगी के लिए डॉग फूड ज्यादा पसंद करते हैं।

परमजीत गुलरी ने बताया कि एक माह में उनकी बिक्री लगभग 10 लाख से ऊपर की होती है। इस हिसाब से उनकी सालाना बिक्री एक करोड़ से ऊपर बैठती है। इसी प्रकार कई कंपनियों के 50 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर उत्तराखंड में हैं।

डॉक्टरों ने माना है मुफीद
विदेशी डॉग फूड को पशु चिकित्सकों ने भी कुत्तों के लिए मुफीद माना है। डॉग शो देखने आए वेटनरी डॉ. मनीष पटेल ने बताया कि कुत्तों के लिए डॉग फूड बैलेंस डाइट है। इसमें मिनरल्स होते हैं, जो रोटी, मांस और दूध में भी होते हैं।

500-700 रुपए का एक किग्रा फूड
स्टाल स्वामियों ने बताया कि ज्यादातर डॉग फूड अलग-अलग प्रजातियों और उम्र के लिए 500 से 700 रुपए प्रति किग्रा की दर पर उनके पास उपलब्ध हैं। 10 किलो का एक पैकेट पांच से सात हजार का बैठता है। छोटी प्रजाति का कुत्ता 100-150 ग्राम और बड़ी प्रजाति का कुत्ता 500-800 ग्राम फूड दिनभर में खाता है।

इन प्रमुख कंपनियों के उत्पाद बाजार में
रॉयल केनिन, सिंबा, पेडिगिरी, ड्रूल्स, पाइपे आदि मुख्य कंपनियां फूड प्रोडक्ट बनाती हैं। इनके उत्पाद आसानी से राशन की दुकानों पर भी मिल जाते हैं।

मैदानी क्षेत्रों में ज्यादा कारोबार
स्टॉल स्वामियों ने बताया कि डॉग फूड का ज्यादा कारोबार दून, हरिद्वार, रुद्रपुर, ऊधमसिंह नगर आदि जगहों पर ज्यादा है।
विज्ञापन

फैंसी ड्रेस और खिलौनों का बाजार रहा गुलजार

डॉग शो में कुत्तों की आकर्षक ड्रेस और खिलौनों का बाजार भी गुलजार रहा। कपड़ों और खिलौनों के स्टॉल पर पशु प्रेमियों की दिनभर भीड़ लगी रही। स्टॉल पर फैंसी ड्रेस, स्वेटर, टी-शर्ट समेत अन्य सर्दियों के कपड़े सजे थे। कपड़े इतने आकर्षक थे कि हर कोई अपने डॉगी के लिए इन्हें खरीदने में व्यस्त दिखा।

स्टॉल स्वामी मनोज भट्ट ने बताया कि सर्दियों में कुत्तों के पहनने के लिए कोट और स्वेटर की ज्यादा बिक्री होती है। उन्होंने बताया कि उनके पास 200 से लेकर दो हजार रुपए तक के कपड़े उपलब्ध हैं। कई लोग अपने डॉगी के लिए खिलौने खरीदते भी नजर आए।

700 से 1500 तक का वुलन डॉग हट
कुत्ते को सर्दी से बचाने के लिए वुलन हट भी बाजार में उपलब्ध है। अमूमन लकड़ी के हट में कुत्तों को रखा जाता है, लेकिन सर्दी के लिए अलग से वुलन हट बनाई गई। इसकी कीमत डॉगी की कदकाठी के अनुसार निर्धारित की गई है।

टाई-पट्टों की कई किस्में
स्टॉल पर डॉगी की टाई, पट्टों और जंजीरों की भी अलग-अलग किस्में दिखाई दी। कुत्तों की टाई 100 से 200 रुपए, जंजीर 200 से 1000 रुपए और पट्टों की कीमत भी 200 से 1000 रुपए के लगभग है।

इन खिलौनों से खेलते हैं कुत्ते
बॉल, रिंग, डिस्क, रबर बॉल, हार्ड बॉल

डॉगी का ग्रूमिंग पार्लर
डॉग शो में डॉगी को सजाने संवारने के लिए आपातकालीन ग्रूमिंग पार्लर भी लगा था। शहर में ऐसे कई ग्रूमिंग पार्लर हैं, जहां एक बार ग्रूमिंग कराने का खर्च 2500 से 3000 हजार रुपए तक आता है। इसमें कुत्ते को नहलाने से लेकर नाखूनों की सफाई, दांतों की सफाई, बालों की सफाई आदि काम होते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें