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यात्रा सुखद बनाने को उत्तराखंड में आ रही मेट्रो

Thu, 07 May 2015 08:26 AM IST
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
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दून-ऋषिकेश और हरिद्वार को मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट से जोड़े जाने की कवायद पर मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने काम शुरू कर दिया है।
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प्रोजेक्ट के लिए शासन से हरी झंडी मिल चुकी है। प्राधिकरण के लिए प्रोजेक्ट का ब्ल्यू प्रिंट आउटसोर्सिंग कंपनी ने तैयार किया है। कंपनी ने प्रत्येक किलोमीटर पर 40 करोड़ रुपए का खर्च आने का ब्योरा दिया है। देहरादून से ऋषिकेश और हरिद्वार हर दिन हजारों यात्री आते-जाते हैं। इन दो रूटों पर यात्रा का जरिया बस ही है।

जो सुविधाजनक नहीं है। वहीं, ट्रैफिक जाम के कारण ‘वर्किंग क्लास’ का समय खराब होता है। एमडीडीए ने शासन को इस संबंध में प्रस्ताव दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया। पहले देहरादून से हरिद्वार तक मेट्रो लाइन का प्लान था। अब इसे कॉरिडोर का रूप दिया जा रहा है, जिसमें देहरादून- ऋषिकेश-हरिद्वार में पहले चरण में मेट्रो लाइन बिछाई जाएगी।
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डीपीआर के बाद लगेगी अंतिम मुहर

दिल्ली की कंपनी को भू-उपयोगिता रिपोर्ट तैयार करने का काम दिया गया था। कंपनी ने अपनी रिपोर्ट एमडीडीए को सौंप दी है। एमडीडीए भू-उपयोग के साथ ही ‘प्रोजेक्ट कॉस्ट’ से शासन को अवगत कराएगा। उसके बाद डीपीआर बनेगी फिर सरकार की अंतिम मुहर लगेगी।

मेट्रो ट्रेन से हर दिन हजारों यात्रियों को राहत मिलेगी। इससे पर्यटन भी बढ़ेगा। काम शुरूआती चरण में है। सभी रिपोर्ट सकारात्मक रही तो प्रोजेक्ट पर जल्द काम शुरू हो जाएगा।
- पीसी दुम्का, एमडीडीए सचिव

हर कस्बे से जुड़ेगी मेट्रो
एक तरफ दून से हरिद्वार होते हुए दून-दिल्ली एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जा रहा है, वहीं मेट्रो का रूट इससे अलग होगा। दून से मेट्रो मोहकमपुर, हर्रावाला, डोईवाला, भानियावाला, रानीपोखरी होते हुए ऋषिकेश जाएगी। दूसरा रूट भानियावाला से लालतप्पड़, छिद्दरवाला, नेपाली फार्म, रायवाला होते हुए हरिद्वार हो सकता है।

विकासनगर भी जुडे़गा
एमडीडीए अधिकारियों के अनुसार, अगले चरण में दून से विकासनगर और हरिद्वार से रुड़की तक मेट्रो रूट का विस्तार किया जाएगा। इस दौरान कई स्टेशन बनाए जाएंगे, ताकि हर कस्बे को इससे जोड़ा जा सके।

कई सौ करोड़ का प्रोजेक्ट
कंपनी ने शुरूआती रिपोर्ट में आकलन किया है कि एक किलोमीटर पर 40 करोड़ रुपए का खर्चा आएगा। इसमें अभी भूमि अधिग्रहण का बजट शामिल नहीं है। एमडीडीए अधिकारियों के अनुसार, मेट्रो में भूमि अधिग्रहण ज्यादा नहीं किया जाता। जहां पर भूमि नहीं मिलेगी, वहां अंडर ग्राउंड निर्माण किया जाएगा। इसलिए इसमें जमीन अधिग्रहण का मसला नहीं फंसेगा।
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