खगोलशास्त्र के जानकारों के मुताबिक आकाश में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत वेग से जाते हुए अथवा पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें ही उल्का पिंड कहते है। अल्मोड़ा स्थित अंतरिक्ष एस्ट्रोनामी क्लब के राकेश बिष्ट ने बताया कि जब उल्का पिंड उच्च वेग से पृथ्वी के वायु मंडल में प्रवेश करता है तो यह चमकदार घटना होती है। जिसे हम उल्का या शूटिंग तारा कहते हैं।
इन उल्काओं को उल्का बौछार से भ्रमित नहीं होना चाहिए। एक बहुत ही चमकीले उल्का को एक आग का गोला कहा जाता है। इसे स्मोक ट्रेन और डेटोनेशन (जो अक्सर उल्कापिंड पैदा करता है) के साथ जोड़ा जाता है तो इसे एक बोल्ट कहा जा सकता है। उल्कापिंड सामान्य तौर पर धूमकेतु या क्षुद्रग्रह का टुकडा है जो पृथ्वी के वायुमंडल में गिरता है।