उन्होंने क्रॉल को हाथी के लिए जेल और प्रताड़ित करने का स्थान बताया। साथ ही इसकी निंदा भी की। एनजीओ ने हाथी की वास्तविक स्थिति जानने और उसके पुनर्वास की व्यवस्था के लिए पांच वन्यजीव पशु चिकित्सकों की एक समिति का गठन करने, डा. अदिति शर्मा पर कार्रवाई करने और हाथी को पालतू बनाने के लिए दिए जा रहे प्रशिक्षण को तत्काल बंद करने की मांग की है।
उधर, पीसीसीएफ मोनिष मल्लिक ने बताया कि यह कोई परमाणु हथियार का जखिरा नहीं है, जो किसी को दिखाया नहीं जा सकता। लोगों की सुरक्षा के लिए हाथी को सभी के सामने पकड़ा गया था। हाथी के साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया गया।
पालतू बनाने के लिए हाथी को क्रॉल में रखकर प्रशिक्षित किया जा रहा है। बाद में वन विभाग द्वारा गश्त के कार्यों में हाथी को उपयोग में लाया जाएगा। यदि किसी को आपत्ति है तो वह स्वयं कैंप में जाकर हाथी को देख सकते हैं। हालांकि उन्होंने पत्र के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी होने से इनकार किया है।