भाजपा में राष्ट्रीय स्तर पर अमित शाह की टीम के जल्द सामने आने की संभावना है।
सवाल यही है कि पिछली बार उत्तराखंड को केवल एक पद से संतोष करना पड़ा था, इस बार प्रदेश के लिए शाह का विजन भी सामने आएगा।
फिलहाल मामला राष्ट्रीय टीम में प्रदेश की हिस्सेदारी का है। ज्यादातर नेताओं को डर है कि कहीं संगठन की हिस्सेदारी भी मंत्रिमंडल जैसी ही ना रह जाए।
विगत नौं अगस्त को राष्ट्रीय परिषद की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर अमित शाह के नाम पर मुहर लगाने के बाद अब नई टीम पर सभी की निगाहें लगी है।
त्रिवेंद्र सिंह रावत को मिली थी टीम में जगह
टीम राजनाथ में उत्तराखंड से केवल त्रिवेंद्र सिंह रावत को बतौर सचिव जगह मिली थी।
हालांकि इससे पहले नितिन गड़करी की टीम में प्रदेश से दो राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एक राष्ट्रीय प्रवक्ता समेत कई पद राज्य के पास थे, लेकिन टीम राजनाथ में केवल त्रिवेंद्र ही जगह पाने में कामयाब रहे थे।
हालांकि इस बार भी संख्या बढ़ने के आसार तो नहीं लग रहे लेकिन फिर भी कई नेताओं ने जोर लगाया है। देखने वाली बात यह होगी कि त्रिवेंद्र सिंह रावत नई टीम में रहेंगे या अन्य कोई जिम्मेदारी मिलेगी।
पंद्रह अगस्त से पहले हो जाएगा टीम का गठन
चर्चा तो धन सिंह रावत के भी राष्ट्रीय टीम में जाने की है। धन सिंह इस समय प्रदेश उपाध्यक्ष है और वह पहले प्रदेश महामंत्री (संगठन) रह चुके हैं। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय टीम का गठन पंद्रह अगस्त से पहले ही हो जाएगा।
पिछले दिनों राष्ट्रीय प्रवक्ता के लिए प्रदेश से अनिल बलूनी का नाम लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन अब उनके बारे में नई खबर आ रही है।
जानकारी यह है कि बलूनी को फारेस्ट या वाइल्ड लाइफ से जुड़ी किसी प्राधिकरण या कमेटी में अहम दायित्व सौंपा जा सकता है।
बलूनी प्रदेश में भी निशंक सरकार में वन एंव पर्यावरण अनुश्रवण समिति के अध्यक्ष रह चुके है। इसलिए माना जा रहा है कि उन्हें केंद्र में कुछ इसी तरह का दायित्व मिलेगा।
प्रदेश संगठन का गणित भी अहम
चर्चा तो प्रदेश संगठन में बदलाव की भी है। विधानसभा की तीन सीटों के उपचुनाव में मिली हार के बाद लगभग यह तय मान लिया गया कि प्रदेश संगठन में फेरबदल होगा।
इसके बाद पंचायत चुनाव में भी पार्टी की दुर्गति ने राष्ट्रीय नेतृत्व को सोचने पर मजबूर कर दिया। इसीलिए राष्ट्रीय टीम में प्रदेश की हिस्सेदारी से पहले केंद्रीय नेतृत्व उत्तराखंड में बदलाव पर अपनी कसरत पूरी करेगा।
तभी आगे की कार्यवाही होगी। क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष बदलने की सूरत में यह देखा जाएगा कि जिन्हें केंद्रीय टीम में शामिल करना है उन्हें प्रदेश में जिम्मेदारी देना कितना उचित रहेगा।