हाईकोर्ट ने काशीपुर बार एसोसिएशन को आदेश दिया है कि वह बार सदस्य अमरीश कुमार अग्रवाल की सदस्यता तत्काल प्रभाव से बहाल करे। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि कोई भी सदस्य अपनी बार के खिलाफ याचिका दायर कर सकता है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार काशीपुर बार एसोसिएशन की ओर से निष्कासित सदस्य अमरीश कुमार अग्रवाल ने हाईकोर्ट में स्पेशल अपील दायर कर कहा था कि वह काशीपुर बार एसोसिएशन के सदस्य हैं, लेकिन काशीपुर बार ने बिना किसी कारण उनकी सदस्यता निरस्त कर दी।
वहीं, बार का कहना है कि याचिकाकर्ता ने बार एसोसिएशन की गरिमा को ठेस पहुंचाते हुए मर्यादाओं से बाहर जाकर कार्य किया। इसलिए उनकी सदस्यता निरस्त की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने अपनी सदस्यता निरस्त करने के मामले में एकलपीठ के समक्ष चुनौती दी थी लेकिन एकलपीठ ने याचिका को निरस्त कर दिया था कि वह अपनी बार के खिलाफ याचिका दायर नहीं कर सकते है और यह मेनटेनेबल नहीं है।
न्यायालय के आदेश का गलत प्रयोग करने पर ऊधमसिंह नगर डीएम सहित अन्य को अवमानना नोटिस
हाईकोर्ट ने न्यायालय के आदेश का गलत प्रयोग करने पर हाईकोर्ट ने ऊधमसिंह नगर के डीएम नीरज खैरवाल, एसडीएम सितारगंज निर्मला बिष्ट और लोनिवि के अधिशासी अभियंता केके तिलारा को अवमानना नोटिस जारी किया है। अदालत ने उक्त सभी को दो जनवरी तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई अब दो जनवरी को होगी।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार सितारगंज निवासी अधिवक्ता दयानंद और दो अन्य ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर प्रशासनिक अधिकारियों पर न्यायालय के आदेश का गलत प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कोर्ट ने पूर्व में रुद्रपुर के रम्पुरा ग्राम सभा के प्रधान मनमोहन सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद अतिक्रमण के संबंध में प्रदेश भर के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे। इसमें पूरे राज्य में सार्वजनिक स्थानों, गलियों और सड़कों पर किए गए अतिक्रमण को चिह्नित करने के लिए जिला स्तर पर कमेटियां गठित कर तीन माह के भीतर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा गया था। कोर्ट ने कमेटी में राजस्व विभाग के अधिकारियों को भी शामिल करने को कहा था।
इसके साथ ही याचिकाकर्ता को निर्देश दिए थे कि वह सभी जिलाधिकारियों को इसमें पक्षकार बनाए लेकिन प्रशासन कोर्ट के आदेश की अनदेखी कर सितारगंज में रोड चौड़ीकरण के नाम पर आवासीय और व्यावसायिक दुकानों को तोड़ रहा है और इसका विरोध करने पर उनको हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दिया जा रहा है।
याचिकाकर्ता का कहना था कि कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा है कि प्रदेश में कहीं भी अतिक्रमण हुआ है तो इसकी जांच करके उसे चिह्नित कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें लेकिन यूएस नगर प्रशासन इस आदेश का गलत प्रयोग कर रहा है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने डीएम ऊधमसिंह नगर नीरज खैरवाल, एसडीएम सितारगंज निर्मला बिष्ट और लोनिवि के अधिशासी अभियंता केके तिलारा को अवमानना नोटिस जारी कर दो जनवरी तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
रोपवे निर्माण के खिलाफ दायर याचिका पर सरकार से जवाब तलब
हाईकोर्ट ने रानीबाग से नैनीताल के लिए प्रस्तावित रोपवे निर्माण के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। पर्यटन विभाग की ओर से पेश शपथपत्र में कहा गया है कि रोपवे बनाने का यह पहला सर्वे है और रोपवे कहीं भी बनाए जा सकते हैं। इनके निर्माण से किसी भी तरह का खतरा होने की आशंका नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार नैनीताल निवासी पर्यावरणविद प्रो. अजय रावत ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड और राज्य सरकार की ओर से रानीबाग से नैनीताल के लिए रोपवे का निर्माण प्रस्तावित है। रोपवे के लिए निहाल नाले और बलियानाले के मध्य मनोरापीक पर निर्माण कार्य होना है। याचिका में कहा गया कि ये दोनों नाले भूगर्भीय रिपोर्ट के आधार पर अतिसंवेदनशील क्षेत्र है। इसलिए यहां किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं किया जा सकता।
पूर्व में भी हाईकोर्ट ने हनुमानगढ़ी क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर रोक लगाई थी। कोर्ट ने पूर्व में उनकी जनहित याचिका को स्वीकार करते हुए टूरिज्म डेवलमेंट बोर्ड एवं राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने को कहा था, लेकिन राज्य सरकार के जवाब नहीं दिया। सरकार के अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। इसके बाद कोर्ट ने उनकी मांग को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार से तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा।