शिकायत पर 18 फरवरी 2019 को एसडीएम और पुलिस ने निरीक्षण किया तो लाइसेंस निलंबित होने के बाद भी वहां दवाएं बन रही थीं। इस पर एसडीएम ने फैक्टरी को सील कर दिया था।
आरोप है कि कुछ दिनों बाद बिना अनुमति के ही फैक्टरी की सील खोलकर फिर से चोरी छिपे दवाई का काम शुरू कर दिया गया। उन्होंने इसकी शिकायत फिर डीएम से की और फैक्टरी लाइसेंस निरस्त होने के दस्तावेज भी दिखाए। आरोप है कि शिकायत करने पर उक्त व्यक्ति फैक्टरी में नकली दवाएं बनाकर झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रहा है। निदेशक सचिन सिंघल ने व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही गंगनहर कोतवाली में भी शिकायत की है। एसएसआई देवराज शर्मा ने बताया कि बृहस्पतिवार को फैक्टरी जाकर जांच की गई। वहां दवाई बनाई जा रही थी, लेकिन कोई भी दस्तावेज नहीं दिखाए गए। तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने फैक्टरी सील होने के बाद उत्पादन पर रोक लगा दी थी। अब यह फैक्टरी रात में अवैध रूप से चल रही है। मामले में जांच कर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
इस फैक्टरी का लाइसेंस निलंबित है। ऐसे में फैक्टरी में दवाई नहीं बनाई जा सकती है। अगर ऐसा है तो मामले में जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-ताजवर सिंह, ड्रग कंट्रोलर, उत्तराखंड