फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रुड़की: लाइसेंस निलंबित, फैक्टरी हो चुकी सील, फिर भी वहीं बन रही दवा

Fri, 13 Mar 2020 07:15 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • फैक्टरी के निदेशक ने एसएसपी व ड्रग विभाग से की मामले में शिकायत
  • लगाया आरोप- फैक्टरी का शेयर होल्डर जबरन कब्जा कर बना रहा दवा
  • वर्ष 2019 में ड्रग कंट्रोलर ने फैक्टरी का लाइसेंस कर दिया था निलंबित
विज्ञापन
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

रुड़की के सालियर क्षेत्र में बिना लाइसेंस के ही एक फैक्टरी में दवाएं बनाई जा रही हैं। फैक्टरी सील होने के बाद भी रात में दवाएं बनाए जाने का काम जोरों पर चल रहा है। मामले में फैक्टरी के निदेशक ने ही एसएसपी और ड्रग विभाग से शिकायत की है। आरोप है कि शामली निवासी शेयर होल्डर फैक्टरी को जबरन अपने कब्जे में लेकर दवाएं बना रहा है।

विज्ञापन

गंगनहर कोतवाली क्षेत्र स्थित सालियर में माधोपुर रोड पर पैंथर हेल्थ केयर लिमिटेड के नाम से दवा फैक्टरी है। फैक्टरी के निदेशक सचिन सिंघल ने एसएसपी डी सेंथिल अबूदई कृष्णराज एस और ड्रग विभाग को शिकायत कर बताया कि फैक्टरी में शामली निवासी एक व्यक्ति आठ प्रतिशत का शेयर होल्डर है।


उसने दबंगई दिखाते हुए फैक्टरी पर कब्जा कर लिया है। इसकी शिकायत उन्होंने पिछले साल डीएम और ड्रग विभाग से की थी। पांच फरवरी 2019 को ड्रग विभाग ने फैक्टरी का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था। आरोप है कि इसके बाद भी फैक्टरी में वह चोरी छिपे दवाएं बनवा रहा था।

विज्ञापन
विज्ञापन

शिकायत पर 18 फरवरी 2019 को एसडीएम और पुलिस ने निरीक्षण किया तो लाइसेंस निलंबित होने के बाद भी वहां दवाएं बन रही थीं। इस पर एसडीएम ने फैक्टरी को सील कर दिया था।
 
आरोप है कि कुछ दिनों बाद बिना अनुमति के ही फैक्टरी की सील खोलकर फिर से चोरी छिपे दवाई का काम शुरू कर दिया गया। उन्होंने इसकी शिकायत फिर डीएम से की और फैक्टरी लाइसेंस निरस्त होने के दस्तावेज भी दिखाए। आरोप है कि शिकायत करने पर उक्त व्यक्ति फैक्टरी में नकली दवाएं बनाकर झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रहा है। निदेशक सचिन सिंघल ने व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
 
साथ ही गंगनहर कोतवाली में भी शिकायत की है। एसएसआई देवराज शर्मा ने बताया कि बृहस्पतिवार को फैक्टरी जाकर जांच की गई। वहां दवाई बनाई जा रही थी, लेकिन कोई भी दस्तावेज नहीं दिखाए गए। तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने फैक्टरी सील होने के बाद उत्पादन पर रोक लगा दी थी। अब यह फैक्टरी रात में अवैध रूप से चल रही है। मामले में जांच कर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। 

इस फैक्टरी का लाइसेंस निलंबित है। ऐसे में फैक्टरी में दवाई नहीं बनाई जा सकती है। अगर ऐसा है तो मामले में जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-ताजवर सिंह, ड्रग कंट्रोलर, उत्तराखंड
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें