इसको लेकर छात्र बेहद परेशान नजर आए और कई छात्रों ने इसकी शिकायत चिकित्सा शिक्षा विभाग से की। छात्रों का कहना था कि यह उनके साथ धोखा है। सरकार कह रही है कि पुराने शुल्क पर दाखिले होंगे और हाईकोर्ट के आदेश पर शुल्क परिवर्तित होगा जबकि निजी कॉलेज नए शुल्क पर दाखिले देने की बात कह रहे हैं। इस वजह से बड़ी संख्या में छात्र दाखिले से वंचित रह गए हैं। सरकार और कॉलेजों की इस खींचतान से उनका भविष्य बर्बाद हो रहा है।
छात्रों का कहना है कि वे अखिल भारतीय स्तर पर मेडिकल पीजी प्रवेश परीक्षा नीट देकर यहां पहुंचे थे। स्टेट कोटे से सीटें आवंटित हुई थीं, लेकिन कॉलेज ने दाखिला नहीं दिया है। इस मामले में एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी ने बताया कि हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था की है कि 2018 में वह एसजीआरआर विवि द्वारा निर्धारित शुल्क ले सकते हैं। शुल्क संबंधी पूरा विवरण हाईकोर्ट में जमा करा दिया गया है। हाईकोर्ट का फैसला मान्य होगा। दूसरी ओर, हिमालयन मेडिकल कॉलेज शुल्क मामले के लिए स्वामी राम हिमालयन विवि के कुलपति डॉ. विजय धस्माना को फोन किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। जब उनका पक्ष आएगा तो वह भी प्रकाशित किया जाएगा।
हमारे संज्ञान में दोनों कॉलेजों का नया शुल्क वसूलने का मामला आया है। हाईकोर्ट के आदेश और सरकार के नियमों के हिसाब से यह सरासर गलत है। छात्रों का नुकसान हुआ है। हमने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जा रही है।
-डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा