जनवरी माह में जांच के बाद पीड़ित की तरफ से शहर कोतवाली में यौन उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसी बीच संजय कुमार ने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया था।
विवेचना के दौरान पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में संजय कुमार पर दुष्कर्म का आरोप भी लगाया था। पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने 164 के तहत दर्ज कराए बयान में पुलिस को दिए बयानों की पुष्टि की थी। इसी आधार पर पुलिस ने मुकदमे में धारा 376 (दुष्कर्म) को बढ़ा दिया था।
विवेचना के दौरान दुष्कर्म के आरोप की पुष्टि नहीं हुई। पीड़िता ने जो तारीख बताई थी, उस दिन संजय कुमार की लोकेशन देहरादून से काफी दूर थी। मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों से इसकी पुष्टि हुई।
पुलिस ने डाटा उड़ाने के आरोपाें के बीच संजय कुमार का मोबाइल एफएसएल भेजा था। सोमवार को आई एफएसएल रिपोर्ट में किसी तरह का डाटा उड़ाने की पुष्टि नहीं हुई। विवेचक ज्योति चौहान ने मंगलवार को अधिकारियों से मंत्रणा करने के बाद बुधवार को यौन उत्पीड़न के आरोप में भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री संजय कुमार के खिलाफ आरोप पत्र दे दिया।
धारा 354 क के अनुच्छेद (3) और (4)
कानूनी विशेषज्ञाें के अनुसार ये धारा महिला के यौन उत्पीड़न से संबंधित है। इसमें किसी महिला को गलत निगाह रखते हुए छूना, शारीरिक संबंध बनाने को कहना, महिला की इच्छा के विपरीत अश्लील साहित्य दिखाना और महिला पर अश्लील टिप्पणी करना शामिल है। इसमें अधिकतम सजा तीन वर्ष का कारावास और आर्थिक दंड होता है। यह अपराध समझौता योग्य नहीं है।
मीटू प्रकरण में पूर्व संगठन मंत्री संजय कुमार के खिलाफ यौन उत्पीड़न की धारा 354 क के अनुच्छेद (3) और (4) के तहत आरोप पत्र दिया गया है। विवेचना के दौरान दुष्कर्म की पुष्टि ना होने के कारण धारा 376 को हटा दिया गया है।
-निवेदिता कुकरेती, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक।