पीड़िता का कहना है कि पहले वकील के जरिए भी सुरक्षा की अर्जी भेजी गई, पर उसे रिसीव नहीं किया गया है। एसपी देहात से बात कर वह सुरक्षा उपलब्ध करने की गुहार लगा चुकी है, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। वह बयान दर्ज कराने को तैयार है, लेकिन पुलिस की सुरक्षा की जिम्मेदारी तो ले। उसने मेल और व्हाट्सअप के जरिए संदेश भेजकर बार-बार सुरक्षा मांगी, मगर उसे सुरक्षा के बारे में कोई जवाब नहीं मिलता।
पीड़िता का आरोप है कि सुरक्षा देने से ज्यादा पुलिस का दबाव उसके मकान मालिक पर है कि उससे मकान खाली करवा लिया जाए। आज उसके पास दून में सिर छुपाने की जगह नहीं है। वह चौरतरफा दबाव से बचने के लिए मारी-मारी फिर रही है। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस उसे गैर जिम्मेदार साबित करने पर तुली हुई
पुलिस पीड़ित महिला को सुरक्षा उपलब्ध कराने को तैयार है। वह अपने पते पर उपलब्ध नहीं है। पीड़िता जहां बताएगी, वहां उसे सुरक्षा उपलब्ध करा दी जाएगी। पुलिसकर्मियाें को उसके घर पर भेजा गया था, जहां पर वह नहीं मिली। ऐसे में पीड़िता को ही बताना होगा कि उसे कहां और कैसी सुरक्षा चाहिए।
- निवेदिता कुकरेती, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
यह था प्रकरण
भाजपा से जुड़ी एक महिला ने प्रदेश भाजपा के महामंत्री (संगठन) संजय कुमार पर यौन उत्पीडन का आरोप लगाकर प्रदेश की राजनीति में सियासी भूचाल ला दिया था। महिला कार्यकर्ता ने संजय कुमार पर अश्लील मैसेज भेजने और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। पार्टी स्तर पर कार्रवाई न होने पर पीड़ित महिला ने अमर उजाला आफिस आकर आपबीती सुनाते हुए साक्ष्य उपलब्ध कराए थे। मीटू प्रकरण सुर्खियां बनने के बाद संजय कुमार को पद से हटा दिया गया था।