फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड: एमडीआर शुल्क को लेकर व्यापारियों में बढ़ी नाराजगी, UPI से बनाई दूरी, दुकानों पर कैश में कारोबार

Sat, 19 Sep 2026 11:11 AM IST
Renu Saklani माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून

सार

यूपीआई से भुगतान की आसान व्यवस्था अब कारोबारियों के लिए उलझन का कारण बनती नजर आ रही है। अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर एमडीआर शुल्क की व्यवस्था की चर्चा के बीच कई कारोबारियों ने अभी से कैश में लेनदेन शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
UPI - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क के मामले में कारोबारियों को अब यूपीआई समझ नहीं आ रही है। इस पर व्यापारियों ने सख्त लहजे में विरोध भी जताना शुरू कर दिया है। भले ही व्यवस्था के लागू होने में अभी करीब एक महीना है लेकिन शहर के कई कारोबारियों ने कैश में कारोबार शुरू कर दिया है।

विज्ञापन


एक जगह पेट्रोल पंप पर क्यूआर कोड पर हेल्पर भर्ती का विज्ञापन ही चस्पा कर दिया गया। छोटे कारोबारी भी विरोध में पीछे नहीं। बाजार में एक दुकान के बाहर सिर्फ कैश में भुगतान की तख्ती लटकी दिखी हालांकि इसके बारे में कहा जा रहा है कि यह पुरानी है।

गौरतलब है कि आगामी 15 अक्तूबर से यूपीआई के माध्यम से 2000 रुपये से अधिक का भुगतान लेने पर कारोबारियों को .4 फीसदी शुल्क देना होगा। हालांकि सरकार का कहना है कि इसका असर आम आदमी पर नहीं पड़ेगा। पीटूपी यानी पर्सन टू पर्सन भुगतान करने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

शुल्क लेना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता

सरकार की इस व्यवस्था से कारोबारी खासे नाराज दिख रहे हैं। ऐसे कारोबारी जहां अधिकतर लोग इस सीमा से अधिक का भुगतान करते हैं उनमें से कई ने अभी से यूपीआई के माध्यम से भुगतान लेना बंद कर दिया है। धामावाला, पलटन बाजार और इसके आसपास के कारोबारियों ने इसका विरोध किया है। व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई को लागू हुए 10 साल हो गए हैं।

ये भी पढे़ं...उत्तराखंड: अब राजाजी टाइगर रिजर्व में फुल डे सफारी की तैयारी, हर गेट से दो वाहनों को मिल सकेगी अनुमति

विज्ञापन
विज्ञापन


हमारा देश पूरी दुनिया में डिजिटल लेनदेन में नंबर एक पर है। अब एकाएक इस तरह का शुल्क लेना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। इससे उन्हें नुकसान होगा। ऐसे में फिर से उन्हें पुरानी कैश व्यवस्था पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। कुछ कारोबारी तो इशारों इशारों में इसका सीधा भार ग्राहकों पर ही पड़ने की बात कह रहे हैं। उनके ये इशारे दूसरे कारोबारियों की तरफ भी थे जो शायद इस शुल्क की किसी न किसी तरीके से ग्राहकों से ही भरपाई करें।


 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें