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Dehradun News: एमडीडीए ने ध्वस्त किए 29 अवैध अतिक्रमण

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Iभारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती के चलते नहीं हो सका विरोध
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Iआज अतिक्रमण चिह्नित कर होगी निशानदेही, कल से फिर चलेगा बुलडोजर
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I एमडीडीए ने एक बार फिर मलिन बस्ती में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की। दिन भर चली कार्रवाई के दौरान वीर गबर सिंह बस्ती में 29 अवैध अतिक्रमण ध्वस्त कर दिए गए। पूरी बस्ती को आखिरी छोर तक छावनी में तब्दील किया गया था। इसके चलते बस्ती के लोग ज्यादा विरोध भी नहीं कर पाए और खुद ही अपने भवनों को तोड़ना शुरू कर दिया। शुक्रवार को नए अतिक्रमण पर निशान लगाए जाएंगे। इसके बाद शनिवार को फिर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
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Iगौरतलब है कि पिछले कुछ समय से एनजीटी ने नदियों के किनारे अतिक्रमण को हटाने को लेकर सख्ती दिखाई है। इसके बाद से नगर निगम और एमडीडीए हरकत में हैं। पहले नगर निगम की ओर से अतिक्रमण अभियान चलाकर अलग-अलग बस्तियों में मकानों को ध्वस्त किया था। इस दौरान एमडीडीए की ओर से वीर गबर सिंह बस्ती और काठ बंगला बस्ती में लोगों को नोटिस दिए गए थे। इनसे 2016 से पहले से मकान होने का प्रमाण मांगा गया था। इस दौरान 412 लोगों में से 249 लोग ऐसे थे, जो प्रमाण नहीं दे पाए थे। इसके बाद विगत सोमवार को एमडीडीए ने काठ बंगला बस्ती में 26 मकानों को ध्वस्त किया था। इस कार्रवाई के दौरान वीर गबर सिंह बस्ती में एक महिला की मौत हो गई थी। जिसे लेकर लोगों ने महिला की मौत सदमे के कारण बताई थी और सड़क पर जाम लगा दिया था। इसके बाद से एमडीडीए ने अतिक्रमण पर कार्रवाई तो नहीं की लेकिन बस्ती में अवैध अतिक्रमण का मौके पर जाकर सर्वे करते हुए लाल निशान लगाए गए। इसके बाद बृहस्पतिवार को एक बार फिर चार जेसीबी और भारी पुलिस बल के साथ एमडीडीए की टीम वीर गबर सिंह बस्ती पहुंची और जिन घरों पर निशान लगाए गए थे उन्हें तोड़ना शुरू किया। इस दौरान लोगों ने विरोध किया, लेकिन भारी पुलिस बल के आगे कार्रवाई आगे बढ़ती रही। शाम तक 29 अतिक्रमण को ध्वस्त किया गया। शुक्रवार को बस्ती में फिर से निशान लगाने का काम होगा। इसके बाद अतिक्रमण हटेगा। बता दें कि बस्ती में करीब 250 अवैध अतिक्रमण चिह्नित किए गए गए हैं। इन सभी को ध्वस्त किया जाएगा।
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Iमकान गिराने के लिए लगाए गए थे 100 मजदूर
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Iजिस बस्ती में कार का पहुंचना भी मुश्किल है, वहां बृहस्पतिवार की सुबह चार जेसीबी गलियों में पहुंचकर तोड़फोड़ कर रही थी। कई अतिक्रमण इतनी संकरी जगह थे कि वहां जेसीबी भी नहीं पहुंच पाई। इसके लिए एमडीडीए ने 100 मजदूरों का इंतजाम किया हुआ था। इसके अलावा तोड़फोड़ से पास के घरों को नुकसान न हो। इसको देखते हुए भी मजदूरों को लगाया हुआ था।
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Iजिन हाथों से बनाया था, उन्हीं से तोड़ना पड़ा अपना घर
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Iपहले लोगों को उम्मीद थी कि शायद विरोध प्रदर्शन और विभिन्न स्तर पर ज्ञापन आदि सौंपने के बाद शायद कुछ राहत मिल जाए। लेकिन एमडीडीए ने भारी फोर्स के साथ कार्रवाई शुरू की तो लोगों को साफ हो गया कि अब अतिक्रमण नहीं बच सकेंगे। लेकिन कार्रवाई के दौरान जेसीबी से तोड़फोड़ से जो मकान के हिस्से वैध हैं, उन्हें भी नुकसान पहुंचने का डर रहता है। ऐसे में कई लोगों ने जेसीबी को अपनी ओर से आने से पहले खुद ही अपने मकानों को तोड़ना शुरू कर दिया। इन लोगों का यही कहना था कि उनके लिए दुख की बात यही है कि जिस घर को अपने हाथों से बनाया, उसे खुद ही तोड़ना पड़ रहा है।
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Iऐन मौके पर कागज दिखाए तो मिटा दिया लाल निशान
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Iएमडीडीए ने 2016 से पहले की रिहायश का प्रमाण नहीं दिखाने वाले घरों पर लाल निशान लगाए थे। जब टीम कार्रवाई करने पहुंची तो कुछ लोगों ने प्रमाण होने की बात कही। जिस पर लोगों को हाथोंहाथ कागज दिखाने का मौका दिया गया। ऐसे कई लोगों के कागज मिलने पर लाल निशान मिटा दिए गए। ऐसे लोगों ने राहत की सांस ली।
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Iकाश! बिजली कनेक्शन लगवाने से न चूके होते
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Iबस्तियों में टूटते घरों को देखकर उन लोगों की पीड़ा ज्यादा थी, जो बस्ती में 2016 से पहले से रह रहे हैं लेकिन इसका प्रमाण उनके पास नहीं है। ऐसे लोगों का तर्क था कि उनके पास बिजला का कनेक्शन लगवाने के लिए 2 हजार रुपये तक की रकम नहीं थी। एक महिला का तो यह तक कहना था कि उनके घर में लाइट नहीं है और वे अभी भी रात को मोमबत्ती जलाकर जरूरी काम निपटाते हैं। कार्रवाई के दौरान महिलाएं जगह-जगह खड़े होकर बस यही बातें कर रही थी कि एक घर बचा है तो दूसरा टूट रहा है। किसी के पास कागज है तो किसी के पास नहीं। कार्रवाई के दौरान एक महिला ने बताया कि उन्होंने बिजली का कनेक्शन 2016 में ही लगवाया था। काश एक महीना पहले कनेक्शन लगवा लिया होता तो उनका मकान नहीं टूटता।
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Iकिसी की छत पर तो किसी की सीढि़यों पर मोर्चा संभाले थी पुलिस
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Iबस्ती के एक छोर से लेकर आखिर तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात थी। यही नहीं बस्ती के भीतर पुलिसकर्मी किसी की छत पर बैठे दिखाई दे रहे थे तो किसी के घर की सीढि़यों पर बैठे हुए थे। गलियों से लेकर आखिरी छोर तक पुलिस का पहरा था। प्रशासन की ओर से किसी तरह का विवाद नहीं होने देने के लिए सभी ठोस कदम उठाए गए थे।I
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