- स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने दी प्रस्ताव को मंजूरी
- प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मानसिक रोगियों को मिलेगी उपचार की सुविधा
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहंस) बंगलुरु से सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य डिप्लोमा करने वाले एमबीबीएस डॉक्टर भी अब मनोचिकित्सक घोषित होंगे। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने विभागीय प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस व्यवस्था से मानसिक रोगियों को प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार की सुविधा मिलेगी।
राज्य में मानसिक रोगियों के उपचार के लिए सेलाकुई में एक मात्र राज्य मानसिक चिकित्सालय है। जहां पर लगातार मानसिक रोगियों के इलाज का दबाव बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में मनोचिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए नई पहल की है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान बंगलुरु से एमबीबीएस डॉक्टरों को सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य डिप्लोमा कोर्स कराया जा रहा है। डिप्लोमाधारक डॉक्टरों भी मनोचिकित्सक घोषित होंगे।
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा, सरकार के इस प्रयास से प्रदेश में मनोचिकित्सकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मानसिक रोगियों की पहचान कर उन्हें उपचार उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा विभागीय अधिकारियों को मानसिक रोग के इलाज के प्रभावी व दीर्घकालिक व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए।