मेयर विनोद चमोली अब कानून-नियमों को आधार बनाकर सांसदों-विधायकों पर आक्रामक हो गये हैं। उन्होंने ऐसा दांव चला है जिससे नगर निगम ताकतवर होगा और सांसदों व विधायकों के लिए काम कराना मुश्किल हो जाएगा। इससे पार्षदों को ताकत मिलेगी।
नगर आयुक्त को दिया निर्देश
मेयर ने नगर आयुक्त नितिन भदौरिया को पत्र लिख निर्देश दिए हैं कि सांसद व विधायक अगर अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर जल्द कार्य नहीं करते हैं तो उनका एनओसी रद्द किया जाए।
मेयर ने नगर आयुक्त को निर्देशित किया है कि सांसद-विधायक निधि से प्रस्तावित कार्य में साफ तौर पर वार्ड, स्थान, मार्ग का नाम तथा निर्माण कार्य कहां से कहां प्रस्तावित है का विवरण एनओसी के लिए प्राप्त पत्र में होने पर ही एनओसी दी जाए।
छह महीने होगी एनओसी की वैधता
पत्र में लिखा गया है कि उस एनओसी की वैधता एनओसी के निर्गत होने की तिथि से अधिकतम छह महीने तक ही होगी। मेयर ने निर्देश दिए हैं कि सांसद व विधायक निधि के अतिरिक्त नगर निगम क्षेत्र में अन्य विभागों द्वारा योजनाओं व मदों से प्रस्तावित निर्माण कार्य विभाग से सीधे निगम को एनओसी के लिए पत्र प्राप्त होने पर ही परीक्षण कराकर एनओसी संबंधित विभाग को जारी की जाए।
स्थगित हुई निविदाएं
देहरादून। मेयर ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर 20 फरवरी को आमंत्रित निविदाओं को स्थगित करने के निर्देश दिए हैं। मेयर का कहना है कि पूर्व में विधायकों और पार्षदों में टकराव और प्रकरण से संबंधित जटिलताओं के कारण ऐसा फैसला लिया गया है। दूसरी तरफ ठेकेदारों ने भी विकास कार्यों में निविदा नहीं डालने का फैसला लिया है। इसकी वजह पूर्व में भुगतान नहीं होना रहा है।
नियम विरुद्ध है मेयर का आदेश : राजकुमार
विधायक व संसदीय सचिव राजकुमार ने नगर निगम के आदेश को गैरकानूनी व नियम विरुद्ध बताया है। कहा कि मेयर का आदेश औचित्यहीन है। राज्य की सर्वोच्च पंचायत विधानसभा है। विधानसभा नियम में यह प्रावधान है कि अगर नगर निगम या कोई स्थानीय निकाय 15 दिनों के में अनापत्ति प्रमाण पत्र न दे तो विधायक को काम कराने की अनुमति है। विधायक ने बताया कि अधिकतर सड़कें लोकनिर्माण विभाग बना रहा है। नगर निगम केस्तर पर सीमित सड़कें ही बन रही हैं। हम लोग छह माह तक इंतजार नहीं कर सकते। नगर निगम प्रशासन का रवैया नकारात्मक रहता है। विकास संकुचित सोच का शिकार हो रहा है।