आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू
बुधवार को मेयर आरती भंडारी, लखपत भंडारी और पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के साथ ही नगर निगम में पार्टी की स्थिति मजबूत हुई है। इसके साथ ही चुनाव के समय आमने-सामने रहे नेताओं के एक मंच पर आने को लेकर सोशल मीडिया पर राजनीतिक समर्थकों के बीच सवाल-जवाब और आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। इस घटनाक्रम का दूसरा पहलू भाजपा की अंदरूनी राजनीति से जुड़ा माना जा रहा है।
नगर निगम चुनाव में पार्टी के साथ खड़े रहे पुराने कार्यकर्ताओं और टिकट के दावेदारों के बीच नई एंट्री को लेकर क्या समीकरण बनेंगे, इस पर भी नजर रहेगी। हालांकि पार्टी स्तर पर इसे संगठन के विस्तार और मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि इस वापसी का असर केवल नगर निगम की राजनीति तक रहेगा या आने वाले समय में इसका दायरा और बढ़ेगा। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है, इसलिए फिलहाल किसी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। बावजूद इसके श्रीनगर में बदले राजनीतिक घटनाक्रम ने भविष्य के समीकरणों को लेकर अटकलों को जरूर हवा दे दी है।
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बगावत से वापसी तक
नगर निगम चुनाव में भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़ने और अब दोबारा भाजपा में आने तक आरती भंडारी और लखपत भंडारी का राजनीतिक सफर चर्चा के केंद्र में है। यही वजह है कि बुधवार की ज्वाइनिंग को सामान्य दल-बदल के बजाय स्थानीय राजनीति के बदले समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में पार्टी संगठन के भीतर जिम्मेदारियों और राजनीतिक तालमेल की तस्वीर साफ होने के साथ ही इसके वास्तविक असर का भी आकलन हो सकेगा।