देहरादून के मास्टर प्लान में जिन क्षेत्रों को आवासीय घोषित किया गया वे पहले से ही बसे हुए हैं।
इनके वैध हो जाने के बाद यहां विकास कराना एमडीडीए की असली अग्निपरीक्षा होगी। इन इलाकों में बिना किसी प्लानिंग बेतरतीब बने मकानों के झुंड से रास्ता निकालने में दांतों पसीना आएगा।
न नालियां न सीवर लाइन
यहां न तो नालियां हैं और न ही सीवर लाइन के लिए जगह छोड़ी गई है। अव्वल तो प्राधिकरण ने इन क्षेत्रों के विकास का खाका तक नहीं खींचा है।
औने-पौने खरीदी गई जमीन की एक-एक इंच कीमत वसूलने के चक्कर में माफियाओं ने यहां बिना रास्ता निकाले ही प्लाटिंग कर दी थी।
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प्लाटिंग में घरों की नालियां कहां से निकलेंगी इसको भी नजरअंदाज कर दिया गया। कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां संकरी गलियों के कारण सीवर लाइन तक नहीं डाली जा सकती।
क्लेमनटाउन रेजीडेंशियल सोसाइटी के उपाध्यक्ष महेश पांडेय का कहना है कि कृषि भूमि पर अवैध रूप से बसी आबादी में मूलभूत सुविधाओं के लिए सोचा तक नहीं गया।
जिलाधिकारी कार्यालय में पड़े हैं शिकायती पत्र
दूसरी ओर थरोवाला, बंजारावाला, कुआंवाला, जमनीवाला, मोहकमपुर कला, पथरीबाग, देहराखास, अस्थल, सुद्धोवाला, दनियो का डांडा, बाबा नामदेव एनक्लेव, बिष्ट गांव और बदरीपुर आदि क्षेत्रों में बसने के बाद लोगों को जल निकासी, संपर्क मार्ग आदि का अहसास हुआ।
इसके बाद विवाद शुरु हो गए। विवादों को लेकर बड़ी संख्या में शिकायती पत्र जिलाधिकारी कार्यालय में पड़े हुए हैं। अधिवक्ता आशुतोष शर्मा का कहना है अभी तक ये आबादी अवैध रूप से बसी थी तो लोग विकास के लिए एमडीडीए के पास नहीं जाते थे।
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वैध होने के बाद ये प्राधिकरण के सिर पर सवार हो जाएंगे। इधर एमडीडीए इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। प्राधिकरण उपाध्यक्ष आर मिनाक्षी सुंदरम कहते हैं कि कंपाउंडिंग कैंप से जो शुल्क मिलेगा उसी से विकास का खाका तैयार किया जाएगा।
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