पांच छात्राओं में मास हिस्टीरिया के लक्षण मिले
जानकारों के मुताबिक इस समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग की टीम को ठोस उपाय करने होंगे। विद्यालयों में नियमित रूप से काउंसलिंग की व्यवस्था करनी होगी। जिले में इस साल 30 जुलाई को रैखोली जूनियर हाईस्कूल में छात्राओं के अचानक चीखने, चिल्लाने, नाचने की घटना सामने आई।
तब नौ छात्राएं नाचने के बाद बदहवास होने लगीं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कई दिन तक स्कूल के साथ बोहाला गांव में जाकर छात्राओं की काउंसलिंग की। उसके बाद रैखोली क्षेत्र में मास हिस्टीरिया के मामले थम गए थे। सनेती के इंटर कॉलेज में छह अगस्त को पांच छात्राओं में मास हिस्टीरिया के लक्षण मिले।
अचानक रोने, चिल्लाने लगती हैं स्कूल में छात्राएं
वहां भी मनोचिकित्सक के नेतृत्व में गई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छात्राओं की काउंसलिंग की थी। वहां भी मामला शांत हो गया था। खातीगांव से बीमार बेटियों के साथ अस्पताल पहुंचे अभिभावकों ने बताया कि प्रभावित छात्राएं घर में सामान्य रहतीं हैं लेकिन स्कूल में अचानक रोने, चिल्लाने लगती हैं। मंगलवार को हिमालयी क्षेत्र से सटे जीआईसी खाती की तीन छात्राएं अचानक रोने, चिल्लाने लगी थीं। इनमें से एक छात्रा को मंगलवार शाम जिला अस्पताल लाया गया था तब स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में ये मामला सामने आया।
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अनियमित मासिक धर्म भी मास हिस्टीरिया का कारण
मानसिक तनाव के कारण भी किशोरियां मास हिस्टीरिया की चपेट में आ जाती हैं। एक अध्ययन के अनुसार मासिक धर्म में अनियमितता भी इसका कारण है। नकारात्मक सोच से इस तरह की दिक्कतें सामने आती हैं। इससे बचने के लिए सकारात्मक और वैज्ञानिक सोच रखनी होगी। आठ घंटे की भरपूर नींद लेनी होगी। मास हिस्टीरिया से बचाव में योग और प्राणायाम भी कारगर रहता है। मस्तिष्क पर दबाव देने से बचना चाहिए।
-डॉ. हरीश पोखरिया, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी/मनोचिकित्सक