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Mass Hysteria: अचानक चीखने, चिल्लाने और नाचने लगती हैं किशोरियां, स्वास्थ्य सुविधाएं लाचार, नहीं मिल रहा उपचार

Mon, 12 Dec 2022 03:13 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर।

सार

मास हिस्टीरिया की छात्राओं को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। संचार विहीन गांवों से बीमारी की जानकारी मिलने में देरी हो रही है। स्वास्थ्य टीमों को पहुंचने में भी वक्त लग रहा है। देरी से मामले की जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर भेजी जाती है, तब तक छात्राओं को इलाज मिलने में तीन से चार दिन लग जाते हैं।
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स्कूल में रोने और चिल्लाने लगी छात्राएं - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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पहाड़ के विद्यालयों में पढ़ने वाली किशोरियों में मास हिस्टीरिया के लक्षण सामने आने पर समय पर उन्हें उपचार नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह संचार सेवाओं का अभाव है। देरी से मामले की जानकारी होने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर भेजी जाती है तब तक छात्राओं को इलाज मिलने में तीन से चार दिन लग जाते हैं। बागेश्वर जिले में मास हिस्टीरिया का पहला मामला जुलाई में रैखोली फिर सनेती अब खातीगांव के विद्यालय में सामने आया है।

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रैखोली के विद्यालय और सनेती इंटर कॉलेज में काउंसलिंग के बाद स्थिति सामान्य हो गई। यही वजह है कि खातीगांव में जब मास हिस्टीरिया का मामला सामने आया तो अपर मुख्य चिकित्साधिकारी/मनोचिकित्सक डॉ. हरीश पोखरिया के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम शुक्रवार को खातीगांव रवाना हुई। टीम वहां छात्राओं की काउंसलिंग करेगी।

दूरी अधिक होने के कारण यह टीम शनिवार को जिला मुख्यालय लौटी। खातीगांव संचार विहीन है, जिसकी वजह से स्वास्थ्य विभाग की टीम से शुक्रवार को संपर्क नहीं हो पाया। पहाड़ में हर साल किसी न किसी जिले में मास हिस्टीरिया के मामले सामने आते रहते हैं। इसके मूल कारणों का खुलासा और समाधान करने में स्वास्थ्य विभाग की टीम नाकाम रही है।

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पांच छात्राओं में मास हिस्टीरिया के लक्षण मिले
जानकारों के मुताबिक इस समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग की टीम को ठोस उपाय करने होंगे। विद्यालयों में नियमित रूप से काउंसलिंग की व्यवस्था करनी होगी। जिले में इस साल 30 जुलाई को रैखोली जूनियर हाईस्कूल में छात्राओं के अचानक चीखने, चिल्लाने, नाचने की घटना सामने आई।

तब नौ छात्राएं नाचने के बाद बदहवास होने लगीं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कई दिन तक स्कूल के साथ बोहाला गांव में जाकर छात्राओं की काउंसलिंग की। उसके बाद रैखोली क्षेत्र में मास हिस्टीरिया के मामले थम गए थे। सनेती के इंटर कॉलेज में छह अगस्त को पांच छात्राओं में मास हिस्टीरिया के लक्षण मिले।
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अचानक रोने, चिल्लाने लगती हैं स्कूल में छात्राएं
वहां भी मनोचिकित्सक के नेतृत्व में गई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छात्राओं की काउंसलिंग की थी। वहां भी मामला शांत हो गया था। खातीगांव से बीमार बेटियों के साथ अस्पताल पहुंचे अभिभावकों ने बताया कि प्रभावित छात्राएं घर में सामान्य रहतीं हैं लेकिन स्कूल में अचानक रोने, चिल्लाने लगती हैं। मंगलवार को हिमालयी क्षेत्र से सटे जीआईसी खाती की तीन छात्राएं अचानक रोने, चिल्लाने लगी थीं। इनमें से एक छात्रा को मंगलवार शाम जिला अस्पताल लाया गया था तब स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में ये मामला सामने आया।  

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अनियमित मासिक धर्म भी मास हिस्टीरिया का कारण
मानसिक तनाव के कारण भी किशोरियां मास हिस्टीरिया की चपेट में आ जाती हैं। एक अध्ययन के अनुसार मासिक धर्म में अनियमितता भी इसका कारण है। नकारात्मक सोच से इस तरह की दिक्कतें सामने आती हैं। इससे बचने के लिए सकारात्मक और वैज्ञानिक सोच रखनी होगी। आठ घंटे की भरपूर नींद लेनी होगी। मास हिस्टीरिया से बचाव में योग और प्राणायाम भी कारगर रहता है। मस्तिष्क पर दबाव देने से बचना चाहिए। -डॉ. हरीश पोखरिया, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी/मनोचिकित्सक 
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