साहिबजादों व माता गुजर कौर का शहीदी दिवस बृहस्पतिवार को श्रद्धापूर्वक मनाया गया। प्रात: नितनेम के बाद हजूरी रागी भाई कंवरपाल सिंह ने आसा दी वार का शबद पहिला ‘मरण कबूल जीवण की छड़ि आस...’ व ‘मन रे कउन कुमत तै लीनी...’ का गायन किया। कार्यक्रम में गुरुद्वारा साहिब जी के हेड ग्रंथी ज्ञानी शमशेर सिंह ने बताया कि गुरु गोविंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों ने सुंबा सरहिंद की गुलामी नहीं स्वीकार की। हम सब को अपने धर्म में अडिग रहने की शिक्षा दी। हंसते हुए दीवार में चिनवाकर देश धर्म के लिए शहादत दी लेकिन गुलामी स्वीकार नहीं की। भाई जगजीत सिंह जी के जत्थे ने शबद और सिमरन गायन किया। हेड ग्रंथी भाई शमशेर सिंह ने सरबत के भले के लिए अरदास की, प्रधान गुरबख्श सिंह राजन व जनरल सेक्रेटरी गुलजार सिंह ने संगतों के साथ मिलकर साहिबजादों व माता गुजर कौर की शहादत को प्रणाम किया। संगत ने गुरु का लंगर व प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान गुलजार सिंह, चरणजीत सिंह, सेवा सिंह मठारु, गुरप्रीत सिंह जौली, सतनाम सिंह, विजय पाल सिंह, तिलक राज कालरा, दविंदर सिंह सहदेव, राजिंदर सिंह राजा आदि मौजूद रहे।