उन्हाेंने बताया कि पुष्पेंद्र के पिता और भाई सेना में थे। पिता 2004 में दुश्मनाें से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे, जबकि पुष्पेंद्र का बड़ा भाई बाद में शहीद हुआ। यह गलत संगत में पड़कर नशीले पदार्थों के धंधे में उतर गया। पुष्पेंद्र नेहरू कॉलोनी और वसंत विहार क्षेत्र में एनडीपीएस एक्ट में पहले भी जेल जा चुका है।
वहीं टास्क फोर्स भी पुलिस की तरह नशे के धंधे में सक्रिय छोटी मछलियों को गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपा रही है। उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से लंबे समय से नशे की खेप पहुंचाने वाले मगरमच्छों के आगे वो भी बेबस है। एसटीएफ की एंटी ड्रग जबकि टास्क फोर्स गठित करने के पीछे अफसराें का मकसद बड़े लोगों पर कानूनी शिकंजा कसना ही था।