deepak nainwal dead body
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शहीद दीपक नैनवाल के सेनाधिकारी (अप्र) पिता चक्रधर नैनवाल ने कहा कि उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व है। दीपक नैनवाल के बचपन को याद करते हुए नम आंखोें से कैप्टन चक्रधर ने कहा कि दीपक बचपन से ही बेहद संवेदनशील और आज्ञाकारी था। सेना में भी उसने बेहद अनुशासित जांबाज सैनिक की भूमिका निभाई। उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व है, लेकिन मासूमों के लिए दुख हो रहा है।
तीन पीढ़ियों ने बढ़ाया देश का मान
अमर शहीद दीपक नैनवाल परिवार के इकलौते देशभक्त नहीं हैं, जिन्होंने सेना में रहते हुए देश की सेवा की। उनके पिता चक्रधर नैनवाल ने भी सेना की गढ़वाल राइफल्स में रहते हुए 1971 भारत-पाक युद्ध, कारगिल युद्ध और ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसे सैन्य अभियानों में हिस्सा लेकर देश का मान बढ़ाया। इतना ही नहीं दीपक नैनवाल के दादा सुरेशानंद स्वाधीनता संग्राम सेनानी रहे और उन्होंने देश को आजाद कराने में अहम भूमिका निभाई।
शहीद दीपक नैनवाल का शव घर पहुंचने पर परिजनों में कोहराम मच गया। पत्नी माता-पिता, बहन और भाई सब रोने लगे तो दीपक के दोनों मासूम बच्चों बेटा रेयांश और बेटी लावण्या को कुछ समझ नहीं आया। मां को बिलखता देख कुछ पल के लिए दोनों मासूम भावुक हुए तो दादा चक्रधर शर्मा ने उन्हें कलेजे से लगा लिया।
trivendra singh rawat paying tribute
अमर शहीद नैनवाल के पार्थिव शरीर के साथ आए सेना के अधिकारियों और उनके साथी सैन्यकर्मियों ने बताया कि दीपक बटालियन की घातक टीम का हिस्सा थे। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए सेना की महार रेजिमेंट से उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से लोहा लेने वाली ‘वन राष्ट्रीय राइफल्स’ में की गई। जहां उन्होंने न सिर्फ कई अहम सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया बल्कि कई आतंकवादियों को उन्हें ढेर करने में भी अहम भूमिका निभाई।
शहीदों के परिजनों को मुहैया कराएंगे हरसंभव मदद : सीएम
शहीद को अंतिम विदाई देने पहुंचे सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्रकारों से रूबरू होते हुए कहा कि सरकार अमर शहीदों की शहादत को यूं ही बर्बाद नहीं होने देगी। शहीदों के परिजनों को सरकारी नौकरी मुहैया कराने और उन्हें हर संभव सहायता देने का संकल्प पहले ही सरकार ले चुकी है।
उन्होंने कहा कि यह दुख की बात है कि देवभूमि का एक और जवान देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गया। सीएम ने कहा कि अमर शहीद दीपक नैनवाल की शहादत पर उन्हें गर्व है। इससे पूर्व उन्होंने शोक संतृप्त परिजनों से मुलाकात कर उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री रावत उस समय भावुक हो गए जब शहीद की पत्नी ज्योति और मां पार्वती देवी मुख्यमंत्री के सामने फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने दोनों को ढांढस बधाते हुए सांत्वना दी।