साहिया। जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर के कई गांवों में सोमवार से मरोज पर्व की शुरुआत हो गई। लोगों ने देवता से सुख और शांति की कामना की। देर शाम तक गांवों में गीत-संगीत का दौर चलता रहा। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में जश्न मनाया। खान-पान के साथ ही मनोरंजन के भी विशेष प्रबंध किए गए हैं।
सोमवार को क्षेत्र के 150 से अधिक गांवों में मरोज पर्व शुरू हो गया है। सुबह लोगों ने मंदिर जाकर पूजा की। इसके बाद हथियारों की पूजा की गई। देवता को खिचड़ी का भोग लगाया गया। फिर हर घर-परिवार में एक-एक बकरे की बलि दी गई। देर शाम लोगों ने पंचायती आंगन में जमकर हारुल और तांदी नृत्य किया। क्षेत्र के शेष गांवों में मंगलवार से पर्व मनाया जाएगा।
लोक मान्यताओं के अनुसार क्षेत्र में किरमीर नामक राक्षस के आतंक से छुटकारा पाने की खुशी में मरोज पर्व मनाया जाता है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि पहले जनवरी माह में पूरा क्षेत्र बर्फ से ढक जाता था। बर्फ में कोई फसल नहीं हो पाती थी। ऐसे में इस दौरान बकरे के मांस का सेवन किया जाता था।
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वाहनों की कमी से जूझते रहे लोग
चकराता। मरोज पर्व पर घर जाने के लिए सोमवार को भी सड़कों पर वाहनों की भारी कमी नजर आई। लोगों को छोटे वाहनों पर ओवरलोड होकर सफर करना पड़ा। साहिया बाजार में भी खरीदारी के लिए लोगों की खासा भीड़ दिखाई दी। मंगलवार से पूरा जनजातीय क्षेत्र मरोज पर्व के जश्न में डूब जाएगा।