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माओवादी खीम सिंह से घंटों पूछताछ, सवालों का हां या ना में ही दिया जवाब 

Mon, 22 Jul 2019 03:42 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रपुर
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खीम सिंह - फोटो : फाइल फोटो
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यूपी एटीएस और खुफिया एजेसियों ने माओवादी खीम सिंह बोरा से दूसरे दिन भी कस्टडी रिमांड में कई घंटों तक लगातार पूछताछ की। लेकिन खीम से एटीएस और दूसरी एजेंसियां माओवादियों की रणनीति, मूवमेंट की जगह आदि के बारे में कुछ खास जानकारी नहीं जुटा पाई हैं। उत्तराखंड में भी पूर्व में गिरफ्तार हुए माओवादियों के बारे में भी थोड़ा बहुत खीम ने जुबां खोली है।

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दरअसल कुमाऊं के नैनीताल, अल्मोड़ा और ऊधमसिंह नगर में डेढ़ दशक पहले से माओवादी गतिविधियां शुरू हुई थी। लोगों को अधिकार दिलाने के नाम पर माओवादियों ने पैठ बनानी शुरू की थी। लेकिन हंसपुर खत्ता में माओवादी कैंप पकड़े जाने के बाद माओवादियों की गिरफ्तारी होनी शुरू हुई तो ये लोग भूमिगत हो गए थे। इसके बाद बीच-बीच में पोस्टर लगाना, दीवारों में भड़काऊ नारे और गुपचुप पर्चे बांटने माओवादी अपनी सक्रियता दिखाते रहे।

पुलिस ने अल्मोड़ा, नैनीताल और यूएसनगर में माओवादियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए और गिरफ्तारियां भी की थी। लेकिन 50 हजार का इनामी खीम सिंह पुलिस को लगातार चकमा देने में कामयाब होता रहा। साल में तीन से चार बार उसकी अल्मोड़ा में आवाजाही होने की बात सामने आई है। यूपी एटीएस के हत्थे चढ़े खीम सिंह से लखनऊ में कस्टडी रिमांड के दूसरे दिन भी घंटों तक पूछताछ की गई।
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सूत्रों के अनुसार पूछताछ में अधिकांश समय खीम सिंह सवालों का जवाब हां या ना में ही देता रहा। पुलिस उससे न तो नए साथियों के नाम उगलवा सकी और न ही माओवादियों की रणनीतियों, ठिकानों और लीड करने वाले नेताओं के नामों के बारे में जानकारी हासिल कर सकी। इतना ही नहीं यूपी और उत्तराखंड में भूमिगत होकर कोड नेम से काम कर रहे उसके साथियों के बारे में भी ज्यादा कुछ उसने नहीं बताया। फिलहाल एटीएस के पास कस्टडी रिमांड के तीन और दिन बचे हुए हैं। वहीं यूएसनगर की खुफिया और पुलिस टीम भी लखनऊ में ही माओवाद के संबंध में पूछताछ में कोई जानकारी मिलने को लेकर डेरा जमाए है।

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