ईएसआई के पैनल में शामिल प्रदेश के कई छोटे-बड़े अस्पताल लंबित भुगतान न होने से ठप होने के कगार पर पहुंच गए हैं। हाल यह है कि ओपीडी जैसी आवश्यक सेवाएं तो प्रभावित हो ही रही हैं, वहीं अस्पतालों के लिए डॉक्टरों और कर्मचारियों की तनख्वाह तक निकालना मुश्किल हो गया है। कई अस्पताल तो ईएसआई के पैनल में शामिल होने से कन्नी काट चुके हैं।
लंबित सरकारी भुगतान से परेशान कई छोटे-बड़े अस्पताल ऐसे भी हैं जो एमएसएमई के दायरे में आते हैं, बावजूद इसके उनका भुगतान नहीं हो पा रहा है। गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कुछ हफ्तों पहले निर्देश दे चुकी हैं कि एमएसएमई के दायरे में आने वालीं इकाइयों के बकाया का भुगतान जल्द से जल्द किया जाए, बावजूद इसके यह देरी हो रही है।
दून के अस्पतालों का करोड़ों बकाया
जौलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ.एसएल जेठानी ने बताया कि ईएसआई पर सवा 24 करोड़ से अधिक का भुगतान बकाया है। इसमें सवा करोड़ रुपये सुपर स्पेशलिटी सुविधा और 20 करोड़ सामान्य मरीजों का शामिल है। सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सुविधा को पिछले नवंबर में अस्पताल ने भुगतान न होने पर बंद कर दिया है। साथ ही लॉकडाउन में आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते राज्य सरकार के साथ ही केंद्र को भी पत्र लिखकर भुगतान शीघ्र कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो अस्पताल सामान्य मरीजों को भी ईएसआई सुविधा देने में असमर्थ हो सकता है।
वहीं, पटेलनगर स्थित श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल पर भी ईएसआई का 40 करोड़ से अधिक का भुगतान बकाया है। अस्पताल के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी ने बताया कि संबंधित विभाग से बकाया भुगतान को लेकर पत्राचार भी चल रहा है। इतनी बड़ी धनराशि का भुगतान न होने की वजह से दिक्कत लाजिमी है। बावजूद इसके ईएसआई के मरीजों को फिलहाल इलाज की सुविधा मिल रही है।
हरिद्वार में मेट्रो अस्पताल ने बंद की ओपीडी
ईएसआई के तहत इलाज के बदले धनराशि न मिलने पर मेट्रो हॉस्पिटल ने ओपीडी बंद कर दी है। मेट्रो हॉस्पिटल के सीईओ संदीप वैष्णव ने बताया कि अस्पताल का 14 करोड़ रुपये का बकाया है। इसमें से आठ करोड़ बिना भर्ती के इलाज और जांच करने का बकाया है, जबकि अन्य छह करोड़ भर्ती कर इलाज करने का बकाया है। यह धनराशि सन 2016 से बकाया है। बकाया न मिलने से अस्पताल की व्यवस्था सुचारु रखना मुश्किल हो रहा है। सीईओ ने बताया कि बकाया का भुगतान न होने से ईएसआई के मरीजों के लिए 15 जून से ओपीडी बंद कर दी गई है।
वहीं, दूसरी ओर भूमा अस्पताल के प्रवक्ता राजेंद्र शर्मा के अनुसार उनके अस्पताल के भी करीब पांच करोड़ रुपये ईएसआई के पास बकाया हैं। कई बार पत्राचार करने के बाद भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। ऐसे में अस्पताल में इस सुविधा के तहत इलाज करने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। केवल ऐसे मरीजों का ही इलाज किया जाता है, जो ऑनलाइन पंजीकरण कराकर आते हैं। सीधे अस्पताल में आने वालों का इलाज नहीं किया जा रहा है।
हल्द्वानी के चार अस्पताल भी कर रहे इंतजार
ईएसआई के तहत इलाज करने वाले शहर के चारों अस्पतालों का पिछले वर्ष का अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। अस्पतालों ने भुगतान के लिए बिल भेज रखे हैं। बृजलाल हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के निदेशक डॉ.अजय पाल ने बताया कि ईएसआई के तहत इलाज के एवज में चार करोड़ का भुगतान ईएसआई निदेशालय से होना है। बिल बनाकर निदेशालय को भेजा जा चुका है। कृष्णा हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के प्रबंध निदेशक डॉ.जेएस खुराना ने बताया कि लगभग 60 लाख रुपये का बकाया है। वहीं बांबे हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के प्रबंध निदेशक डॉ.शैलेंद्र मिश्रा ने बताया कि उनका एक करोड़ से अधिक का बकाया है। साईं हास्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ.मोहन सती ने बताया कि एक से डेढ़ करोड़ का भुगतान बकाया है।
काशीपुर-रुद्रपुर में कई अस्पताल संकट में
ईएसआई योजना के तहत जिन अस्पतालों में ईएसआई की सुविधा है, उन्हें लंबे समय से बकाया न मिलने के कारण परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। काशीपुर में आठ निजी अस्पतालों और रुद्रपुर में दो निजी अस्पतालों में ईएसआई के तहत इलाज की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन इन अस्पतालों को लंबे समय से इलाज करने के बाद भी सरकार से भुगतान नहीं हुआ है। काशीपुर के आठ निजी अस्पतालों का छह महीनों से लेकर करीब तीन साल तक का ईएसआई पेमेंट रुका हुआ है। यह राशि 30 लाख से लेकर करीब छह करोड़ रुपये तक की है। काशी पुर में उजाला अस्पताल का करीब 16 करोड़ रुपये की ईएसआई धनराशि बकाया है, यह तब है जबकि यह अस्पताल एमएसएमई के तहत पंजीकृत है। वहीं, रुद्रपुर में दो अस्पतालों के करीब तीन करोड़ तक की राशि अटकी पड़ी है।
ईएसआई अस्पतालों को इसी सप्ताह जारी हो सकते हैं 70 करोड़ रुपये
ईएसआई अस्पतालों का बैकलॉग प्रदेश सरकार जल्द ही कुछ हद तक पूरा करने वाली है। श्रम मंत्री हरक सिंह के मुताबिक इसके लिए अधिकारियों को आदेश जारी कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में इएसआई अस्पतालों का करीब 100 करोड़ रुपये का बैकलॉग है। श्रम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक कोविड-19 को देखते हुए ईएसआई अस्पतालों के भुगतान को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा गया है। इसके लिए श्रम विभाग के अधिकारियों ने काम भी शुरू कर दिया है।
मंत्री हरक सिंह के मुताबिक अस्पतालों की कुल देनदारी करीब सौ करोड़ रुपये है। इनमें से करीब 70 करोड़ रुपये का भुगतान जल्द करने को कहा गया है। इसके लिए अस्पतालों की ओर से बिल जारी किए जा चुके हैं। उम्मीद है कि इसी हफ्ते यह भुगतान हो जाएगा। मंत्री ने बताया कि अधिकतर अस्पतालों को उनका पिछला भुगतान ही किया जाना है। कोशिश की जा रही है कि भुगतान की इस व्यवस्था को स्ट्रीमलाइन किया जा सके। सरकार यह महसूस कर रही है कि कोरोना काल में अस्पताल फ्रंट लाइन वारियर के रूप में कार्य कर रहे हैं और डाक्टरों समेत अन्य स्टाफ के मनोबल को ऊंचा रखने के लिए समय से भुगतान जरूरी है।