सुप्रीम कोर्ट ने हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी और चंडी देवी मंदिरों में प्राप्त दान पर अब शासन के नियंत्रण को स्वीकार कर लिया है।
हरिद्वार के डीएम और एसएसपी लिए जाने वाले दान पर निगरानी करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के आदेश को मान्य कर दिया है। मंदिर समिति की सभी याचिकाएं सिरे से खारिज कर दी गईं।
हरिद्वार के समाजसेवी जेपी बड़ोनी ने वर्ष 2011 में नैनीताल उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका में कहा गया था कि हरिद्वार की तीन प्रमुख यात्री बाहुल्य संस्थाएं लिए जाने वाले दान में भारी हेराफेरी करती है। ये संस्थाएं यात्री को दान की रसीद देने के बजाय दर्जनों गुल्लकों में धनराशि लेती रही हैं। जिसे संस्था के पदाधिकारी ठिकाने लगा देते हैं।
नैनीताल उच्च न्यायालय ने शिकायत को सही पाया और तीन जनवरी 2012 को आदेश पारित किया था कि हरकी पैड़ी की प्रबंधकारिणी संस्था गंगा सभा, मनसा देवी मंदिर कमेटी तथा चंडी देवी मंदिर कमेटी तत्काल प्रभाव से गुल्लकें हटाएं। इनके स्थान पर दान देने वाले यात्रियों को बकायदा रसीद दी जाए।