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उत्तराखंडः मनसा और चंडीदेवी मंदिर के दान पर सुप्रीम कोर्ट का शिकंजा

Tue, 28 Feb 2017 11:37 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार
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mansa devi temple - फोटो : file photo
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सुप्रीम कोर्ट ने हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी और चंडी देवी मंदिरों में प्राप्त दान पर अब शासन के नियंत्रण को स्वीकार कर लिया है।
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हरिद्वार के डीएम और एसएसपी लिए जाने वाले दान पर निगरानी करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के आदेश को मान्य कर दिया है। मंदिर समिति की सभी याचिकाएं सिरे से खारिज कर दी गईं।
              
हरिद्वार के समाजसेवी जेपी बड़ोनी ने वर्ष 2011 में नैनीताल उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका में कहा गया था कि हरिद्वार की तीन प्रमुख यात्री बाहुल्य संस्थाएं लिए जाने वाले दान में भारी हेराफेरी करती है। ये संस्थाएं यात्री को दान की रसीद देने के बजाय दर्जनों गुल्लकों में धनराशि लेती रही हैं। जिसे संस्था के पदाधिकारी ठिकाने लगा देते हैं।
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नैनीताल उच्च न्यायालय ने शिकायत को सही पाया और तीन जनवरी 2012 को आदेश पारित किया था कि हरकी पैड़ी की प्रबंधकारिणी संस्था गंगा सभा, मनसा देवी मंदिर कमेटी तथा चंडी देवी मंदिर कमेटी तत्काल प्रभाव से गुल्लकें हटाएं। इनके स्थान पर दान देने वाले यात्रियों को बकायदा रसीद दी जाए।
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जिले के वरिष्ठ अधिकारियों अब बराबर दखल देंगे

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
संस्थाओं के कार्यों में जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति निर्धारित करे। ये दोनों अधिकारी इन संस्थाओं की नियमित बैठकों में भी या तो खुद भाग लें या अपने प्रतिनिधियों को भेजें। यदि संस्थाएं अनियमितताएं बरतती हैं तो तत्काल उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। तब से सरकारी प्रतिनिधियों ने तीनों स्थलों से गुल्लकें हटवा दी।
              
मनसा देवी और चंडीदेवी मंदिर समिति उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध वर्ष-2012 में सर्वोच्च न्यायालय पहुंची। दोनों की याचिकाएं सुनवाई से पूर्व ही खारिज कर दी गई। तब दोनों कमेटियों ने तीन न्यायाधीशों की बैंच के सम्मुख याचिका दायर की। वे याचिकाएं भी निरस्त हो गई। चंडी देवी मंदिर समिति तो इसके बाद घर बैठ गई, लेकिन मनसा देवी कमेटी ट्रस्ट सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के सम्मुख 2013 में पहुंची।

मुख्य न्यायाधीश से गुहार लगाई गई कि धार्मिक कार्यों में जुटी मनसा देवी को न्याय दिया जाए तथा नैनीताल उच्च न्यायालय का आदेश अमान्य कर दिया जाए। लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने 16 जनवरी को वादी तथा उसके अधिवक्ताओं को भी अपना पक्ष रखने को बुलाया। मंदिर समिति ने अलग-अलग बिंदु उठाते हुए चार याचिकाएं दायर की थी। जिन सभी पर विद्वान मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई की।

न्यायाधीश ने किसी भी याचिका में दम नहीं पाया। सुनवाई में न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ भी मुख्य न्यायाधीश के साथ बैठे। दोनों न्यायाधीशों ने तमाम याचिकाओं को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। अब नैनीताल उच्च न्यायालय का आदेश पूर्णतया लागू हो गया है। मंदिर कमेटियों के प्रबंधन में जिले के वरिष्ठ अधिकारियों अब बराबर दखल देंगे। 
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