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फलों के 'राजा' पर संकट के 'बादल'

Sun, 04 Aug 2013 12:57 PM IST
देहरादून/बिशन सिंह बोरा
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दून की प्रसिद्ध बासमती और लीची की फसल के बाद अब रसीले मीठे आम की फसल पर ग्रहण लग गया है। आम पर सफेद रंग के ‘घुंडी कीट’ वैज्ञानिक नाम (शूट गॉल सिला) ने धावा बोल दिया है।
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इससे दून में ही इस कीट के प्रकोप से ग्यारह सौ बीघा में आम के पेड़ सूखने की कगार पर हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने सर्वे के बाद यह खुलासा किया है। केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डा. एसएस सिंह ने कहा कि इससे प्रदेश भर में आम की तीस फीसदी फसल को नुकसान हुआ है।

दून में फल पट्टी क्षेत्र सोरना, रुद्रपुर, टिमली, बाड़वाला में तीन साल पहले तक जिन बागों से आम का उत्पादन डेढ़ सौ कुंतल तक हुआ करता था। घुंडी कीट के अटैक के बाद 80 फीसदी उत्पादन घट गया है।
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पौड़ी के कोटद्वार, दुगड्डा, श्रीनगर, फरासू, नैनीताल के रामनगर, कालाढूंगी, हल्द्वानी, बेतालघाट, अल्मोड़ा के द्वाराहाट, भिकियासैंण, पिथौरागढ़ के धारचूला, बागेश्वर, ऊधमसिंहनगर के रुद्रपुर में फसलों को नुकसान हुआ है।

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक ने बताया कि दून के बाड़वाला में कीट का प्रकोप 80 से 90 फीसदी तक देखा गया है। इससे उत्तराखंड में आम की फसल को लगभग 20 करोड़ का नुकसान हुआ है।

बन जाती है नुकीली गांठें
घुंडी कीट का आम के पेड़ की जिस टहनी पर प्रकोप होगा उस पर फूल नहीं आते हैं। फूल की जगह घुंडी बन जाती है। अगस्त के पहले सप्ताह में इस कीट का प्रकोप शुरू हो जाता है।

इस समय कीट अंडे से निकलता है और पत्तियों को चूसकर स्राव करता है। इससे गांठें बनने लगती हैं। जनवरी, फरवरी माह में फ्लावरिंग नहीं होती।

दून में कीट का प्रकोप
देहरादून के सोरना, रुद्रपुर, टिमली, बाड़वाला, डोभरी, बड़वा, आमवाला, कैंचीवाला, भाऊवाला, बसान, कालसी, उत्पाल्टा, समाया, लखवाड़, कोटी, क्वानों, लाखामंडल आदि जगहों पर कीट का प्रकोप फैला हुआ है।

राष्ट्रीय स्तर पर औसत उत्पादकता से कम हैं उत्पादन
प्रदेश में 38994 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आम की खेती की जाती है। इससे कुल उत्पादन 135320 मीट्रिक टन है। प्रदेश में औसत उत्पादकता 3.47 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है। जो राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त औसत उत्पादकता 7.64 मीट्रिक टन से बहुत कम है।

घट गया उत्पादन
सर्वे के दौरान टिमली के जाहिद हसन ने बताया कि आम के आठ बीघा बाग में तीन साल पहले 15 किलोग्राम की एक हजार पेटियों का उत्पादन होता है। जबकि अब मात्र तीन से चार पेटी प्राप्त हो रही है। इसी गांव के जहीर हसन ने भी कुछ इसी तरह की समस्या बताई।

ऐसे करें बचाव
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डा.एसएस सिंह के मुताबिक प्रोफेनोफॉस की दो मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर एवं थायोमिथेक्सॉम एक ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर अगस्त महीने के पहले सप्ताह में छिड़काव करें।
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छिड़काव के समय यह ध्यान रखें कि मौसम पूरी तरह साफ हो। छिड़काव के बाद कम से कम छह से सात घंटे बारिश नहीं होनी चाहिए।
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