जल विद्युत परियोजना मनेरी भाली-2 के घोटाले में कई अधिकारियों पर गाज गिरना तय है। इस घोटाले की जांच रिपोर्ट विजिलेंस ने शासन को सौंप दी है। विजिलेंस ने अपनी जांच में किसे दोषी ठहराया है अभी यह पता नहीं चल पाया है। क्योंकि जांच रिपोर्ट खोली नहीं गई है। शासन को इस घोटाले की जांच रिपोर्ट से हाईकोर्ट को अवगत कराना है।
उत्तरकाशी जनपद में में जल विद्युत परियोजना मनेरी भाली-2 का निर्माण उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएनएल) द्वारा किया गया है। आरोप है कि इस परियोजना में वर्ष 2008-2009 में कई तरह की वित्तीय अनियमितता बरती गई थी। टेंडर जारी करने में निर्धारित शर्तों का उल्लंघन किया गया था।
नदी से रेत निकालने का जो टेंडर दिया गया था उसकी रायल्टी भी संबंधित विभाग को जमा नहीं कराई गई थी। मामला प्रकाश में आने के बाद जुलाई 2010 में शासन द्वारा इसकी जांच विजिलेंस को सौंप दी गई थी। इस बीच मनेरी भाली-2 में कथित अनियमितता को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) भी दायर की गई थी, जो अभी विचाराधीन है। जानकारी के मुताबिक हाईकोर्ट ने शासन से इस घोटाले की जांच रिपोर्ट के बारे में जानकारी मांगी है।
हाईकोर्ट द्वारा जानकारी मांगे जाने के बाद शासन ने विजिलेंस से जांच रिपोर्ट तलब की थी। जानकारी के मुताबिक मंगलवार को विजिलेंस ने शासन को जांच रिपोर्ट सौंप दी है। शासन स्तर पर अभी जांच रिपोर्ट को खोला नहीं गया है। शासन के सूत्रों का कहना है कि अगर इस मामले में किसी आईएएस अधिकारी को दोषी ठहराया गया होगा तो कार्मिक विभाग कार्रवाई करेगा। अगर यूजेवीएनएल के अधिकारी दोषी ठहराए गए होंगे तो ऊर्जा विभाग कार्रवाई करेगा।
विजिलेंस से जांच रिपोर्ट जरूर मांगी जरूर गई थी, क्योंकि इस मामले से हाईकोर्ट को अवगत कराना है। विजिलेंस ने जांच रिपोर्ट सौंप दी है इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
उमाकांत पंवार, प्रमुख सचिव गृह/ऊर्जा