जहर खाने से एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत पर इंसानी रिश्ते एक बार फिर खूनी रिश्तों पर भारी पड़े। दुनिया से रिश्ते-नातों की डोर टूटने के बाद भी अपनों के दिलों की खलिश दूर नहीं हुई।
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ऐसे वक्त में पड़ोसियों ने दो कदम आगे आकर एक अनूठी मिसाल पेश की है। मां-बाप, बड़ी और छोटी बहन की मौत के सदमे से बुत बने रुद्रप्रताप को कुछ समझ में नहीं आ रहा है। वह खुद को संभाले या अपने से चार साल छोटी बहन को। दोनों को मकान मालिक के परिवार ने संभाला।
रायबरेली के लालगंज में मृतक अंशुमान के चाचा-चाची, चेचरे भाई, भतीजों समेत पूरा कुनबा है। पिता योगेंद्र प्रताप वर्ष 2009 तक कानपुर में राशन का कोटा चलाते थे। उनकी मौत के बाद कोटा अंशुमान के नाम आया, लेकिन खाद्यान्न वितरण में धांधली की शिकायत पर पांच माह बाद ही उसका कोटा निरस्त कर दिया गया। इधर संपत्ति विवाद के चलते उसकी अपने चाचा के परिजनों से रंजिश बढ़ गई। वे अंशुमान का नाम तक सुनना पसंद नहीं करते थे।
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कुंडा पुलिस ने अपने स्तर से पता लगाकर उन्हें इस मनहूस घटना के बारे में जानकारी दी तो उन्होंने मूक प्रतिक्रिया दी। दो टूक उन्होंने आने से इनकार कर दिया। उधर, सूचना पर मृतक का साला रवि सिंह व साढ़ू मोनू सिंह समेत चार लोग टैक्सी से काशीपुर आने के लिए चल चुके हैं। सोमवार सुबह तक उनके काशीपुर पहुंचने की संभावना है। दरअसल रवि सिंह के पास यहां आने के लिए पैसे तक नहीं थे, यह बात पता चलने पर हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारियों ने टैक्सी कराने में उनकी मदद की। रवि ने बताया कि जीजा, बहन और भांजियों का काशीपुर में अंतिम संस्कार कराने के बाद वह भांजे रुद्रप्रताप व भांजी आर्या को अपने साथ ले जाएंगे।
ग्राम प्रधान राजकुमार ने बताया कि गांव वालों ने मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए सारी तैयारियां कर ली थी। अखबार में खबर पढ़कर कुछ लोगों ने फोन कर उन्हें बुलाया और अंतिम संस्कार के लिए गुप्त दान दिया। तीन लोगों ने इस काम के लिए सत्रह हजार रुपये की राशि दी। करीब साढ़े नौ हजार रुपये ग्रामीणों ने आपस में एकत्र किए। उन्होंने कहा कि मृतक के साले के पहुंचने के बाद सोमवार को गंगेबाबा रोड स्थित शमशानघाट पर चारों शवों की अंतेष्टि कर दी जाएगी।
मां का जिक्र सुनते ही वह फफक पड़ती है आर्या
Arya
मासूम आर्या को नहीं पता कि उसकी मां अब वापस नहीं आएगी। मां के बगैर उसे पहली बार रात अपने मकान मालिक के पहलू में गुजारनी पड़ी। मां का जिक्र सुनते ही वह फफक पड़ती है। दो साल बड़ा भाई उसे किसी तरह ढाढ़स बंधाता है। स्कूल जाने के सवाल पर कहती है कि हां मैं पढ़ना चाहती हूं, मां मुझे डॉक्टर बनाना चाहती थी, लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे।
परिवार के चार सदस्यों की मौत 14 वर्षीय रुद्रप्रताप और 10 साल की आर्या की जिंदगी पर कहर बनकर टूटी है। मकान मालकिन ने हमदर्दी दिखाते हुए उन्हें आश्रय दिया है। घटना से अंजान आर्या ने रात को दाल चावल खाए। भाई रुद्र को गृहस्वामी के पुत्र अतुल यादव ने खाना खिलाया। रात को अतुल अपने बच्चों के साथ न सोकर रुद्र और आर्या के साथ सोया। सुबह उठते ही रुद्र को मां और बहन के ना होने की खबर मिली तो उसका चेहरा सुन्न हो गया, सदमा इस कदर है कि उसके आंसू तक नहीं निकले। अतुल के साथ वह मोर्चरी पहुंचा, जहां उसकी मां, पिता व बहनों के शव रखे थे।
शायद उसे यह एहसास हो चला है कि इस दुनिया में छोटी बहन के अलावा उसका कोई अपना नहीं है। इसी आभास ने उसे धैर्य प्रदान किया। उधर, आर्या मां के आने की बांट जोह रही थी, वह बार-बार दरवाजे तक जाती। मां के बारे में पूछने पर उसे बताया जाता कि भाई उन्हें लेने गया है। मां उसे बहुत प्यार करती है, वो हमेशा कहती है कि मेरी बेटी डॉक्टर बनेगी। महिला एवं बाल सहायता समिति की अध्यक्षा सरोज ठाकुर ने जब उससे पढ़ने की इच्छा के बारे में पूछा तो उसने जवाब दिया कि वो खूब पढ़ेगी और डॉक्टर बनेगी। सरोज ने कहा कि अगर कोई बंदिश न हो तो वह दोनों बच्चों का संरक्षण लेने को तैयार हैं, लेकिन बच्चों को किसी भी हालत में अनाथालय नहीं भेजना चाहिए। वहीं मकान मालिक सुमन देवी का कहना है कि 19 जून को उसकी बेटी की बारात आनी है। अगर मामा-मामी बच्चों को नहीं अपनाते है, तो बेटी की शादी के बाद वह कानूनी तौर पर बच्चों को अपनाएगी।
हरियावाला के ग्राम प्रधान ने एक निजी अस्पताल के प्रबंधक पर असंवेदनशील होने का आरोप लगाया है। प्रधान राजकुमार का कहना है कि हालात गंभीर होने पर सरिता व उसकी बेटी को निजी अस्पताल में रेफर किया गया था। अस्पताल प्रशासन ने गृहस्वामिनी के पुत्र अतुल यादव से नौ हजार रुपये जमा करा लिए। छह हजार रुपये की दवाईयां मंगा ली। शाम तक उसके 25 हजार रुपये खर्च हो गए। दोनों को भर्ती कराने के बाद वह घर चले आए। आरोप है कि रात 8:30 बजे अतुल के मोबाइल पर अस्पताल से फोन आया। उन्होंने रुपये जमा नहीं कराने पर पुलिस में रिपोर्ट कराने की धमकी दी, जबकि दोनों मरीज उपचाराधीन थे।
मोर्चरी में पहली बार हुआ एक ही परिवार के चार शवों का पोस्टमार्टम
काशीपुर का पोस्टमार्टम हाउस पहली बार एक ही परिवार के चार लोगों के शवों का पोस्टमार्टम किए जाने का गवाह बना। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. कैमाश राणा को एक परिवार के चार शवों के अलावा कुल छह शवों के पोस्टमार्टम करने पड़े। काशीपुर में दो दशक पूर्व तक मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम ब्रिटिश काल में निर्मित पोस्टमार्टम हाउस में होता था। उक्त भवन जर्जर होने के कारण 90 के दशक में नया पोस्टमार्टम हाउस बनाया गया। रविवार को पहली बार कानपुर निवासी अंशुमान सिंह, उसकी पत्नी सरिता व दो बेटियों दिव्यांशी व हिमांशी के शवों का पोस्टमार्टम कराया। विंडम्बना यह रही कि इस दौरान मृतका को कोई भी पारिवारिक सदस्य अथवा रिश्तेदार मौजूद नहीं रहे। हालांकि ग्राम प्रधान राजकुमार समेत हरियावाला के दर्जनों लोग चिलचिलाती धूप में पोस्टमार्टम हाउस पर डटे रहे।
जिला बाल कल्याण समिति की चेयरमैन ने जाना बच्चों का हालचाल
जिला बाल कल्याण समिति की चेयरमैन डॉ. रजनीश बतरा ने भी ग्राम हरियावाला पहुंचकर सरिता के बच्चों को हाल चाल जाना। उन्होंने बच्चों से बात भी की। डॉ. बतरा ने बताया कि यदि बच्चों के परिवार के लोग उन्हें साथ नहीं ले जाते है तो दोनों बच्चों को बाल संरक्षण गृह भिजवा दिया जाएगा। इधर जसपुर विधायक आदेश चौहान व कांग्रेसी नेता संदीप सहगल ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर बच्चे से मुलाकात की।