इसके बाद बैंक से मिलने वाले डेबिट कार्ड, चैक बुक और पासबुक अपने पास रख लेते थे। इन्हीं खातों का विवरण लोगों को उपलब्ध कराने के बाद इनमें पैसा जमा कराते थे। इसके बाद दीपक कुमार, आनंद पांडेय और धर्मेंद्र इन चेक बुक, डेबिट कार्ड आदि माध्यम से खातों से निकालते थे।
ये तीनों कुल रकम का 20 फीसदी हिस्सा दीपक सिंह और मोहित को देते थे। इन दोनों का काम था कि वे नोएडा में बैठकर अलग अलग नंबरों से लोगों को बीमा पॉलिसी में अधिक लाभ का प्रलोभन देते थे। दीपक सिंह का एक काम और था कि वह देशभर के लोगों का डाटा चुराता था।
वह देश की एक बड़ी बीमा कंपनी में क्लर्क है। उसे यह डाटा आसानी से मिल जाता था। इन सभी के बारे में एक बात सामान्य है कि सभी कभी न कभी कॉल सेंटर में काम कर चुके थे। इसी के कारण वे ऐसी बातें करने में सक्षम थे जिससे कि लोगों को झांसे में लिया जा सके।