मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इन क्षेत्रों की भौगोलिक संरचना और घने जंगलों की मौजूदगी के कारण यहां लोकलाइज्ड हैवी रेनफॉल यानी सीमित क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं अधिक होती हैं। पहाड़ी ढलानों पर तेज बारिश का पानी तेजी से नीचे उतरता है, जिससे नदियां और नाले अचानक उफान पर आ जाते हैं।
इसके साथ ही, ढलानों की मिट्टी कमजोर होने के कारण भूस्खलन का खतरा भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित निर्माण गतिविधियां, नदी किनारों पर अतिक्रमण और पर्यावरणीय संतुलन में हो रहा बदलाव भी इन इलाकों को और अधिक संवेदनशील बना रहे हैं। समय-समय पर चेतावनियों के बावजूद लोग जोखिम वाले क्षेत्रों में आवाजाही और ठहराव करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
सौड़ा सरौली में गदेरा तो मालदेवता में सड़क पर टूटा पहाड़
बारिश की वजह से मंगलवार को जिलेभर की सड़कों पर पहाड़ टूटता रहा। मालदेवता क्षेत्र में सल्पर प्वाइंट की ओर से जाने वाले मार्ग पर पहाड़ से मलबा आ गया। इसकी वजह से यह मार्ग ब्लॉक हो गया। इसके अलावा शेरकी रोड पर भी गदेरे से मलबा आने की वजह सड़क पर आवागमन बंद रहा। लोनिवि के अधिकारियों ने मलबा हटवाया।
मालदेवता मार्ग को अभी हाल ही में बनाया गया है। अब तक मार्ग पर काम पूरा नहीं हुआ है। मंगलवार देर रात शुरू हुई बारिश से सुबह पहाड़ का एक हिस्सा टूटकर सड़क पर मलबे के रूप में आ गिरा। सौड़ा सरौली में सेमलवाला गांव वाले रास्ते पर गदेरा लोगों के लिए आफत बना। गदेरे से आने वाले पानी ने मुख्य मार्ग तक मलबा पहुंचा दिया। इसकी वजह से 15 के करीब परिवार घरों में कैद हो गए।
इसी गांव से अखंडवाली, भिलंग होते हुए द्वारा की तरफ निकलने वाला प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाया गया मार्ग कट गया। इनके अलावा कई अन्य मार्गों पर भी मलबा आने की वजह से जगह यातायात प्रभावित हुआ। सूचना पर लोनिवि के अधिकारी मौके पर पहुंचे। कई जगहों पर मलबा हटाकर यातायात को सुचारु कराया बाकी मार्गों को ठीक करने का काम जारी था।