आतंकवाद के समाधान पर उन्होंने कहा कि देश में एक वर्ग ऐसा है जो शांति में नोबल पुरस्कार पाने की होड़ में लगा हुआ है। इसी वजह से वह आतंकियों के सफाए को भी मानवाधिकार हनन करार देता है।
यह वर्ग सरकार के हर सख्त कदम को रोकता है। वर्तमान में कश्मीर में जो समस्या है उसका हल सिर्फ इसी तरह से हो सकता है, जिस तरह केंद्र और सेना प्रयास कर रही है। उन्होंने वर्तमान सरकार के कामकाज और आतंक के विरोध में नीति को सराहा लेकिन, इसे नाकाफी बताया। कहा, सरकार को शांति के कबूतर उड़ाने वालों से दूर रहना होगा तभी देश से आतंकवाद का सफाया हो सकता है।
कश्मीर में पत्थरबाजी की घटना पर उन्होंने कहा कि जो हमारे जवानों की वर्दी पर हमला कर रहा है वह सीधेतौर पर भारत पर हमला कर रहा है। वह आतंकी हैं और देश के दुश्मन हैं।
लिहाजा पत्थरबाजों के प्रति नरम रवैया आने वाले समय के लिए खतरनाक है। कश्मीर में जो हो रहा है वह पाकिस्तान से समर्थित है। यह बात सभी जानते हैं और दशकों से यही चल आ रहा है। इसका हल सिर्फ पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब से हो सकता है।
जनरल बख्शी से जब पाकिस्तान की इमरान सरकार के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इमरान से देश को कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए। इसका सीधा मतलब है कि पाकिस्तान कहने को लोकतांत्रिक है, वहां राज सेना करती है।
सत्ता में इमरान के आने से कुछ नहीं बदलने वाला। इसका उदाहरण पंजाब के अमृतसर में हुए आतंकी हमले से मिलता है। वे अब पंजाब को फिर से तीन दशक वाला पंजाब बनाना चाहते हैं। वहां जो कुछ हुआ वह भी पाकिस्तान का ही किया धरा था।