अपने पुत्र मेघनाद का वध सुन मंदोदरी विलाप करने लगी। ‘मंदोदरी रुदन कर भारी, उर ताड़न बहु भांति पुकारी’ अर्थात् मंदोदरी छाती पीट-पीटकर कई तरह से अपने पुत्र को पुकारकर विलाप करने लगी। यह नजारा था अजबपुर खुर्द में सरस्वती विहार विकास समिति की ओर से चल रही महिला रामलीला का। यहां महिला कलाकारों ने कुंभकर्ण और मेघनाद वध लीला का मंचन किया।
रविवार को रामलीला के नौवें दिन संजीवनी बूटी से लक्ष्मण की मूर्छा टूटने के बाद रावण सेनापति को कुंभकर्ण को जगाने के आदेश देता है। लेकिन, काफी प्रयास के बाद भी कुंभकर्ण नहीं जागता। इसके बाद उसे तरह-तरह के पकवान की खुशबू सुंघाई जाती है जिससे कुंभकर्ण जाग जाता है। रावण कुंभकर्ण को पूरी घटना बताता है। इससे कुंभकर्ण राम-लक्ष्मण से युद्ध करने चला जाता है और युद्ध में श्रीराम कुंभकर्ण को मार देते हैं। कुंभकर्ण के मरने के बाद मेघनाद भी लक्ष्मण के हाथों मारा जाता है। इस मौके पर मुख्य अतिथि यूसीएफ एमडी रमिंद्री मंद्रवाल, महिला उत्थान समिति अध्यक्ष अनुकृति गुसाई रावत, राज्य प्रभारी महिला पतंजलि योगपीठ सीमा जोहार, जिला प्रभारी महिला पतंजलि योगपीठ मुन्नी वैष्णव, पार्षद अनूप नौडियाल, सुभाष यादव, रामलीला निर्देशक सरोज रावत आदि मौजूद रहे।