अनशन पर बैठने की बजाय अपनी मांगों को लेकर वार्ता का रास्ता निकालना चाहिए। उन्होंने स्वामी सानंद को अनशन पर बैठाने वाले का नाम लिए बिना कहा कि उनकी भूमिका की भी जांच होना बेहद आवश्यक है।
केंद्र या राज्य सरकार को अनशन पर ही रोक लगानी चाहिए, ताकि किसी कोई अपनी जान न दें सकें। उन्होंने कहा कि अनशन पर बैठने से पहले अखाड़ा परिषद, कुंभनगरी के संतों से राय मशवरा करना चाहिए था।
ऐसा किया होता तो वह सब उनके साथ खड़े हो सकते थे। उन्होंने कहा कि टिहरी बांध के खिलाफ उनका पत्राचार जारी है, वे भी उसके बिलकुल पक्षधर नहीं हैं। गंगा की अविरलता बेहद जरूरी है।