फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kumbh Mela 2021: 155 साल पहले भी कुंभ में हुआ था शारीरिक दूरी का पालन, ये थी वजह

Fri, 08 Jan 2021 05:04 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
विज्ञापन
हरकी पैड़ी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
विज्ञापन

धर्मनगरी हरिद्वार में इस साल कोरोना संक्रमण के बीच कुंभ का आयोजन शारीरिक दूरी के साथ होने जा रहा है। लेकिन इतिहास में यह पहली बार नहीं है कि जब श्रद्धालु कुंभ में शारीरिक दूरी का पालन करेंगे। 155 साल पहले भी प्लेग महामारी के कारण ऐसा हो चुका है। 

विज्ञापन


जानकारों के अनुसार, कुंभ मेले के आयोजन के इतिहास की बात करें तो कुंभ के दौरान कई बार महामारी का साया रहा। इससे पहले साल 1844, 1855, 1866, 1879 और 1891 का कुंभ भी महामारी के बीच ही संपन्न हुआ था। 

1866 की बात करें तो तब महामारी को कुंभ में फैलने से रोकने के लिए श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक रूप से शारीरिक दूरी का नियम लागू किया गया था। इस दौरान केवल श्रद्धालुओं ने ही नहीं बल्कि संतों और अखाड़ों ने भी इसका पालन किया था। 
विज्ञापन


यही नहीं साल 1844 में हुए कुंभ में तो संक्रमण फैलने से रोकने के लिए तत्कालीन अंग्रेजी सरकार ने श्रद्धालुओं के प्रदेश में आने पर भी पाबंदी लगा दी थी। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पुस्कालय में मौजूद कई किताबों में यह वर्णन है। वहीं, 1760 के कुंभ में हरिद्वार में संन्यासियों और बैरागियों के बीच बड़ा संघर्ष हुआ था। जिससे यह कुंभ भी यादगार कुंभ रहा है।

विज्ञापन

इस साल आने वाले श्रद्धालुओं का होगा एंटीजन टेस्ट

कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं का पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और एंटीजन टेस्ट होगा। हर प्रवेश स्थल पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था होगी।  प्रदेश सरकार 14 जनवरी को होने वाले मकर संक्रांति स्नान पर्व को कुंभ मेले के अन्य स्नानों के लिटमस टेस्ट मान रही है।

भीड़ प्रबंधन को लेकर अभी जो कार्ययोजना तैयार की गई है, मकर संक्रांति का स्नान पर्व पर उसकी परीक्षा होगी। एक तरह से यह भीड़ प्रबंधन को लेकर पूर्वाभ्यास भी होगा।यही वजह है कि इस स्नान में राज्य के भीतर और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को रोका या टोका नहीं जाएगा। कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन करते हुए स्नान पर्व की व्यवस्था होगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें