कुंभ मेले में अस्थायी टैंट कॉलोनी बनाई जानी है, लेकिन मंत्रालय के पत्र से इस पर भी संशय है। पत्र में कहा गया है कि ऐसा देखने में आया है कि बंद जगहों पर संक्रमण का जोखिम सर्वाधिक होता है। किसी भी तरह के टैंट, हॉल, अस्थायी आवास आदि जगहों पर बड़ी संख्या में लोगों के ठहरने से महामारी फैलने का खतरा ज्यादा है। सरकार की दुविधा यह है कि उसे सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं कुंभ में जुटने वाले अखाड़ों के साधु संतों के लिए भी टैंट कॉलोनी तैयार करनी है।
अवधि कम करने पर करें विचार
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुंभ मेला की अवधि सीमित करने को कहा है। राज्य सरकार ने इसकी संभावित अवधि दो माह रखी है। इस प्रस्ताव से उसने केंद्र को भी अवगत करा रखा है। पत्र में ध्यान दिलाया गया है कि कुंभ जैसे धार्मिक आयोजनों में उम्रदराज लोग अधिक आते हैं, ऐसे लोग कोविड-19 के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसलिए कुंभ मेले की अवधि कम करने पर भी विचार करें। यह भी कहा गया है कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए पूर्व में जगन्नाथ यात्रा, अमरनाथ यात्रा और कांवड़ यात्रा आदि को सीमित किया जा चुका है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला
स्वास्थ्य मंत्रालय ने सर्वोच्च न्यायालय के 18 दिसंबर 2020 के आदेश का हवाला दिया है। साथ ही गृह मंत्रालय की ओर से बीती 28 दिसंबर की एसओपी का भी जिक्र किया गया है।
एसओपी में दिए थे ये दिशा-निर्देश
कुंभ मेले के लिए जारी की गई एसओपी में नेगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट लाने, रजिस्ट्रेशन कराने और बुजुर्गों, गर्भवती व बीमार व्यक्तियों को कुंभ में आने से रोकने जैसी बातें पहले ही कह दी गई हैं।
केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों से साफ जाहिर है कि वह कुंभ मेले में जुटने वाली भीड़ से कोविड-19 महामारी के संक्रमण फैलने की आशंका से सहमी है। एक तरह से उसकी यह चिंता वाजिब है। राज्य और केंद्र में कोरोना के मामलों में कमी आ रही है।
टीकाकरण का अभियान आरंभ हो चुका है। कुंभ मेले के दौरान मुख्य स्नान पर्व पर 50 लाख की भीड़ जुटने का अनुमान है। यह केंद्र और राज्य सरकार के लिए बड़ा प्रश्न है कि क्या इतनी अधिक संख्या में जुटने वाले श्रद्धालुओं से सामाजिक दूरी का पालन कराया जाना संभव हो पाएगा। इसके अलावा उनके पंजीकरण, आरटीपीसीआर की नेगेटिव रिपोर्ट की शर्तों को सौ फीसदी पालन हो सकेगा। इस लिहाज से चुनौती और ज्यादा कड़ी हो जाएगी। यही वजह है कि केंद्र की पेशानी पर बल हैं।
विशेषज्ञों की राय और उनके अनुभवों के आधार पर केंद्र सरकार ने कुंभ मेले के लिए एसओपी जारी की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कोरोना संक्रमण को रोकने में उत्कृष्ट कार्य किया है। कुंभ मेला अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव है। कोरोना नियंत्रण में भारत ने जो किया है, उसमें किसी भी तरह का जोखिम न लिया जाए, इसी दृष्टि से केंद्र ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार एसओपी का पालन करेगी। मैं अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व महासचिव का धन्यवाद करना चाहूंगा, जिन्होंने एसओपी का स्वागत किया है।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री