मदरसा बोर्ड के हजारों छात्र मुश्किल में पड़ गए हैं। इन छात्रों के सामने अब नौकरी का संकट खड़ा हो गया है।
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मदरसा बोर्ड से पिछले चार साल में पासआउट मुंशी, मौलवी और आलिम पाठ्यक्रमों के 13,760 छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में है।
ये छात्र न तो कहीं अन्य स्कूल/ कॉलेज में एडमिशन ले पा रहे हैं और न ही इनको किसी संस्थान में नौकरी मिल पा रही है।
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की तरह मान्यता का शासनादेश जारी नहीं
मदरसा बोर्ड की परीक्षा देतीं छात्राएं।
ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि मदरसा बोर्ड के इन पाठ्यक्रमों के लिए माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की तरह मान्यता का शासनादेश जारी नहीं हुआ है।
ऐसा तब है जब मदरसा बोर्ड अपनी बोर्ड बैठकों में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के समकक्ष मान्यता दिए जाने का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजा चुका है। इसके अलावा मदरसों के संगठन भी इसके लिए कई बार आंदोलन कर चुके हैं।
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से उत्तर प्रदेश मदरसा परिषद्, उत्तराखंड मदरसा बोर्ड की परीक्षाओं का आयोजन करता था। साल-2013 से मदरसा बोर्ड ने अपने स्तर पर परीक्षाएं करानी शुरू की। तब से अब तक मुंशी समकक्ष दसवीं (फारसी) में 4464, मौलवी समकक्ष दसवीं (अरबी) में 6200 और आलिम समकक्ष बारहवीं में 3096 छात्र परीक्षा में पास हो चुके हैं।
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड पहले ही पास कर चुका है प्रस्ताव
मदरसा परीक्षा
मदरसा बोर्ड के उप रजिस्ट्रार हाजी अखलाक अहमद ने बताया कि मदरसा बोर्ड को समकक्ष का दर्जा दिलाने के लिए विधायक फुरकान अहमद के पत्र पर संज्ञान लेकर तत्कालीन राज्यपाल ने माध्यमिक शिक्षा परिषद् को इसका परीक्षण करने को कहा था।
उप रजिस्ट्रार के मुताबिक 15 सितंबर, 2015 में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया। जबकि 6 जनवरी 2016 को माध्यमिक शिक्षा परिषद् की बोर्ड बैठक में भी समकक्ष के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई थी।
मदरसों के छात्रों में प्रतिभा की कमी नहीं
उत्तराखंड मदरसा एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना इफ्तिखार अहमद कासमी, सचिव हाफिज शाहनजर बताते है कि मदरसों के छात्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। इन छात्रों को उच्च शिक्षा हासिल करने का मौका मिले, तो ये भी ऊंचा मुकाम हासिल कर सकते हैं। वो बताते है कि उत्तराखंड मदरसा बोर्ड (जब यूपी मदरसा शिक्षा परिषद् से परीक्षा होती थी) से तालीम हासिल करने वाले कई छात्र जामिया मिल्लिया इस्लामिया, अलीगढ़ यूनिवर्सिटी, मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
मैंने हाल ही में मदरसा बोर्ड निदेशक के पद पर चार्ज लिया है। मदरसा बोर्ड के प्रस्ताव के आधार पर माध्यमिक शिक्षा परिषद्, रामनगर से समकक्ष की मान्यता के संबंध में आख्या मांगी गई थी। बोर्ड ने मुंशी व मौलवी को दसवीं और आलिम को बारहवीं के समकक्ष दर्जा दिए जाने की सिफारिश की है। वर्तमान में इसकी फाइल माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पास है। उसके बाद फाइल शिक्षा सचिव के पास जाएगी। उम्मीद है कि छात्रों के हित में मदरसा बोर्ड पाठ्यक्रम को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के समकक्ष, मान्यता का शासनादेश जारी हो जाएगा।
- कैप्टन आलोक शेखर तिवारी, निदेशक, उत्तराखंड मदरसा बोर्ड
मदरसा छात्रों को शिक्षा को मौलिक अधिकार दिलाने के लिए उत्तराखंड बोर्ड को समकक्ष का दर्जा दिया जाना बेहद जरूरी है। मदरसा बोर्ड की नवंबर 2016 व फरवरी 2017 की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास कर शासन को भेजा जा चुका है। इस संबंध में सचिव से कई बार वार्ता हुई। अभी विभागीय मंत्री यशपाल आर्य से मुलाकात की गई थी। उन्होंने जल्द ही इस संबंध में सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
- आरए खान, उपाध्यक्ष, उत्तराखंड मदरसा बोर्ड