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एक लाख के खर्च से बचेगी लाखों की मशीन

Wed, 24 Feb 2016 10:42 AM IST
महेश्वर प्रसाद सिंह / अमर उजाला, देहरादून
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धर्मकांटों की जांच के लिए आई 52 लाख रुपये की मशीन बाट-माप विभाग में करीब पांच साल से धूल फांक रही है।
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मशीन का इस्तेमाल नहीं होने पर विभाग इसे केंद्र को वापस भेजना चाहता है। लेकिन समस्या यह है कि इस पर आने वाला एक लाख रुपये के खर्च का जुगाड़ कहां से किया जाए।

विभाग ने ढुलाई में आने वाले खर्च के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा है। जल्द ही इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो मशीन कबाड़ बन जाएगी। सात साल से बेकार खड़ी मशीन के कई पुर्जे पहले ही चोरी हो गए हैं।
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वर्ष 2008 में निदेशालय विधि माप विज्ञान केंद्र सरकार ने 52.82 लाख रुपये किट मोबाइल मशीन विधिक माप विज्ञान उत्तराखंड को भेजी थी। विभाग ने इस मशीन को जैसे तैसे एक डेढ़ साल तक इस्तेमाल करने के बाद खड़ी कर दिया। इसके पीछे विभाग ने तर्क दिया कि पहाड़ी क्षेत्र में इतनी बड़ी गाड़ी का इस्तेमाल करना संभव नहीं है।

इसमें खर्चा ज्यादा आता है। विभाग ने केंद्र सरकार को दो बार पत्र लिखकर मशीन को किसी दूसरे राज्य में भेजने की सिफारिश की है। मगर केंद्र से अभी तक इनका जवाब नहीं आया है। हालांकि साल 2010 में विभाग की मांग पर केंद्र सरकार ने छोटी किट मोबाइल मशीन भेजी थी, जिसे विभाग इस्तेमाल कर रहा है।

शासन के माध्यम से निदेशक विधि माप विज्ञान केंद्र सरकार को दो बार कोटेशन का पत्र भेजा गया है कि इस मशीन को वापस भेजने में करीब एक लाख आठ हजार 372 रुपये लगेंगे। लेकिन सरकार ने पैसा नहीं भेजा। इस वजह से मशीन करीब छह साल से यहीं खड़ी है।
- एमएस नेगी, उपनियंत्रक, विधिक माप विज्ञान

मशीन की बैटरी चोरी
विधिक माप विज्ञान उपनियंत्रक एमएस नेगी ने बताया कि मशीन करीब पांच साल से ट्रांसपोर्ट नगर स्थित सरकारी राशन के गोदाम में खड़ी है। किसी ने गाड़ी से बैटरी चुरा ली है।
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मशीन के बाकी कल पुर्जों का हाल क्या है यह तो उसके चलाने पर ही मालूम चलेगा। लावारिस मशीन को बिना मैंटेनेंस के कबाड़ में तब्दील होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।
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