जिला जज टिहरी ने आरोपी मनीराम को दुष्कर्म का दोषी मानते हुए उसे दस वर्ष की सजा सुनाई थी। निचली अदालत के इस आदेश को चुनौती देते हुए मनीराम ने जेल से हाईकोर्ट को पत्र भेजा था। इसके बाद हाईकोर्ट ने अधिवक्ता एसके मंडल को न्याय मित्र नियुक्त किया था।
पक्षों की सुनवाई के बाद एकलपीठ ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए याची मनीराम को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त किया।