आशुतोष इलाहाबाद बैंक में बतौर बैंक पीओ ज्वाइन करने जा रहे हैं।
देहरादून के आशुतोष ने लाइलाज बीमारी से लड़कर अपना मुकाम बनाया है। 23 साल पहले उस वक्त आशुतोष के घर में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा जब परिजनों को पता चला कि उनका बेटा मायोपिया (लो विजन) की बीमारी से पीड़ित है।
तब आशुतोष चार साल के थे। आशुतोष की ऑप्टिक नर्व बेहद पतली होने की वजह से वे वह साफ नहीं देख पाते। बीमारी लाइलाज है, लिहाजा मां ने आशुतोष को राष्ट्रीय दृष्टिबाधित संस्थान (एनआईवीएच) में भेज दिया। कुछ दिनों की मेहनत के बाद आशुतोष की जिंदगी को नई राह मिल गई। हाल ही में जारी हुए आईबीपीएस के नतीजों में आशुतोष ने बैंक पीओ बनकर मिसाल कायम की है।
दून के विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए चलने वाले चेशायर होम में वार्डन ममता गुप्ता का बेटा आशुतोष आज न केवल विशेष आवश्यकता बल्कि हर युवा के लिए मिसाल है। आशुतोष गुप्ता को चार साल की उम्र में मायोपिया नाम दृष्टि से संबंधित बीमारी का पता चला। इसके बाद अभिभावकों ने उसे एनआईवीएच और फिर शार्प मेमोरियल भेजा।
यहां उन्होंने खूब मेहनत करके अपनी इस कमजोरी को ही अपना मजबूती बना ली। शार्प मेमोरियल से पांचवीं करने के बाद इंडियन कैंब्रिज स्कूल से फर्स्ट डिवीजन के साथ 10वीं पास की। इसके बाद टचवुड स्कूल से फर्स्ट डिवीजन के 12वीं करने के बाद आशुतोष ने यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) से बीबीए पास किया।