उत्तराखंड राज्य औद्योगिक विकास निगम लि. (सिडकुल) में सरकारी धन की जमकर लूट मचाई गई। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर शुरू कराए गए स्पेशल ऑडिट की रिपोर्ट में सारी कहानी खुलकर सामने आ गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक विकास कार्यों का अधिक भुगतान, अनियमितताओं और निष्प्रयोज्य कार्यों में अरबों रुपये लुटा दिए गए। सिडकुल अफसरों के अलावा यहां काम करने वाली कार्यदायी संस्था विशेष तौर पर यूपीआरएनएन ने भी जमकर मलाई काटी। रिपोर्ट शासन में उच्च स्तर पर दी गई है, जिस पर आगे का निर्णय विधानसभा सत्र के ठीक पहले लिया जाएगा।
सितारगंज, सेलाकुई, काशीपुर समेत राज्य के तमाम औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर और भीतर अरबों रुपये के विवादित कार्यों की एक रिपोर्ट अमर उजाला के 15 दिसंबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी। मामले में मुख्यमंत्री ने स्पेशल ऑडिट कराने के निर्देश दिए थे। लगभग ढाई महीने बाद यह ऑडिट रिपोर्ट सोमवार को शासन को सौंपी गई है। इसमें अनियमितताओं और गड़बड़ी से जुड़े कुल 46 मामलों में घपलों की बात सामने आई है।
ज्यादातर मामलों में साफ है कि जिन कार्यों के लिए करोड़ों रुपये के ठेके जारी किए गए, असल में वे काम बेहद घटिया स्तर से अंजाम दिए गए। ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई करने के लिए 19 फरवरी को सचिव वित्त ने बैठक बुलाई है। उधर, पता चला है कि ऑडिट के आदेश जारी होने के साथ ही सिडकुल में सिविल कार्य देखने वाले महाप्रबंधक संजय रावत और पंकज गुप्ता मेडिकल अवकाश पर चले गए हैं। सिडकुल के इतर अन्य निकायों और विभागों में भी सिडकुल की रकम जमकर फूंकी गई। इसमें 145 करोड़ की रकम खर्च हुई।
सुपरटेक प्रकरण की विजिलेंस जांच
पंतनगर और हरिद्वार समेत अन्य जगह सर्किल रेट से बेहद कम दरों पर सुपरटेक बिल्डर्स को भूमि आवंटित करने के मामले में विजिलेस जांच के आदेश जारी किए गए हैं। नियम-कानून को ठेंगा दिखाकर बेहद न्यूनतम दरों पर दी गईं बेशकीमती भूमि का पैसा आज तक सुपरटेक ने सिडकुल को नहीं दिया है। न केवल सरकार बल्कि सुपरटेक के हाथों इन स्थानों पर बनाए गए फ्लैट खरीदने वाले भी ठगे नजर आ रहे हैं, क्योंकि भुगतान के बावजूद उन्हें प्लैट का कब्जा नहीं मिल रहा है।