वह वर्ष 2024 में द्विपाद विपरीत दंडासन जैसी जटिल मुद्रा में 11 मिनट 05 सेकंड तक स्थिर रहकर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में भी अपना नाम दर्ज करा चुके हैं। उन्होंने योग के शारीरिक अभ्यास के साथ ही आत्मबल और साधना की प्रक्रिया का निरंतर अभ्यास किया।
इस उपलब्धि का प्रमाण पत्र मिलने के बाद अभिषेक कुमार ने विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या से भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रतिकुलपति ने इसे विश्वविद्यालय की समृद्ध योग परंपरा के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि यह सफलता युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। अभिषेक ने अपनी सफलता का श्रेय विश्वविद्यालय के पारिवारिक वातावरण और सकारात्मक सोच को दिया। योग विभाग सहित समस्त विवि परिवार ने उन्हें शुभकामनाएं दीं।