पीठासीन अधिकारियों के 79वें सम्मेलन के समापन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि दल परिवर्तन की समस्या के कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास में कमी आई है।
इसके कारण चुनाव प्रणाली के तहत बार-बार अनावश्यक चुनाव कराने पड़ रहे हैं, जिससे अनिवार्य रूप से सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को मजबूती देने के लिए आने वाले सदनों में आवश्यक कार्यवाही होनी चाहिए। इसलिए सम्मेलन में सामूहिक रूप से एक कमेटी के गठन का निर्णय हुआ।
यह कमेटी पीठासीन अधिकारियों से चर्चा करेगी। ये चर्चा इस बात को लेकर होगी कि संविधान संशोधन के लिए क्या सुझाव हो सकते हैं और इस संबंध में लोस, राज्यसभा, विधानसभाओं और विधान परिषदों ने अपने अपने सदनों में जो नियम बनाए हैं, उनमें क्या परिवर्तन हो सकते हैं, जिससे अध्यक्ष की मर्यादा भी बनी रहे। उनके निर्णयों में पारदर्शिता हो।
यह कमेटी सभी पीठासीन अधिकारियों से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट देगी, जिस पर एक्शन प्लान बनाया जाएगा। संविधान में संशोधन के मुख्यमंत्रियों और राज्य की सरकारों से भी बात करेंगे। उन्होंने कहा कि 2021 में सम्मेलन को 100 साल पूरे हो रहे हैं, इस अवसर पर लोस का विशेष सत्र आहूत होगा। उन्होंने विधानसभाओं में भी विशेष सत्र करने का सुझाव दिया।
इससे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने लोस अध्यक्ष व राज्यपाल व राज्यों से आए पीठासीन अधिकारियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह ने उपस्थित अतिथियों का धन्यवाद किया। समारोह में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, लोस की महासचिव स्नेहलता श्रीवास्तव, विधानसभा सचिव जगदीश चंद, भाजपा अध्यक्ष व सांसद अजय भट्ट भी उपस्थित थे।