चुनावी महासमर में कांग्रेस और उसके अध्यक्ष प्रीतम सिंह पर बेहतर प्रदर्शन करने का बहुत बड़ा दबाव है। प्रीतम सिंह टिहरी सीट से पार्टी के उम्मीदवार हैं। उन्हें अपने चुनाव का संचालन तो करना ही है साथ ही प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते वो अन्य चार सीटों के चुनाव प्रबंधन से भी अलग नहीं हैं। बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रीतम सिंह को सबको साथ लेकर चलना है। जबकि माना जाता है कि कांग्रेस के सबसे मजबूत नेता हरीश रावत से उनका छत्तीस का आंकड़ा है। ताजा बानगी हरीश रावत के नैनीताल के टिकट को लेकर चली जोर आजमाइश में दिखी। इन स्थितियों के बीच प्रीतम सिंह चुनाव में हरीश रावत की बहुत बड़ी जिम्मेदारी को रेखांकित कर रहे हैं। चुनाव से जुडे़ कई सवालों को लेकर अमर उजाला के प्रमुख संवाददाता विपिन बनियाल ने उनसे बातचीत की।
सवाल- लोकसभा चुनाव में आप सबसे बड़ी चुनौती क्या मान रहे हैं? आपकी तैयारियां कमजोर मानी जा रही हैं।
जवाब- हमारे सामने कोई चुनौती नहीं है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि गंभीर उम्मीदवारों को चुनने के लिए पार्टी ने समय जरूर लिया है, लेकिन पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर इससे कोई असर नहीं पडे़गा। हमारी तैयारी पिछड़ी हुई नहीं है। बूथ स्तर पर संगठन शुरू से काम कर रहा है। तैयारी पिछड़ी होती, तो राहुल जी की रैली इतनी सफल नहीं होती।
सवाल- इस चुनाव में आपको और आपकी पार्टी को कोई वोट क्यों दे?
जवाब- पांच साल मोदी सरकार और दो साल त्रिवेंद्र सरकार ने जिस तरह से जनविरोधी कार्य किए हैं, उससे लोग विचलित हैं। भाजपा को उखाड़ फेंकने के लिए तैयार हैं। लोग अब साफ महसूस कर रहे हैं कि कांग्रेस और भाजपा की सरकार में किस तरह का अंतर है। सुशासन, जनहित के निर्णयों के लिए जनता इस बार हमें वोट करेगी। हम एक, दो नहीं, बल्कि पांचों लोकसभा सीट जीतेंगे।
सवाल- कांग्रेस में गुटबाजी है? एक तरफ आप और इंदिरा हृदयेश दिखते हैं, तो दूसरे पाले में हरीश रावत खडे़ नजर आते हैं, ऐसे में कांग्रेस बड़ी उम्मीद कैसे कर सकती है?
जवाब- देखिए, हमारे यहां आंतरिक लोकतंत्र है, जिसे लोग गुटबाजी समझ लेते हैं। हमारे यहां सब कुछ खुला है, जबकि भाजपा में सब कुछ बंद-बंद है। जहां तक खेमेबाजी की बात कर रहे हैं, ऐसा कुछ नहीं है। हम सब साथ हैं। हरीश रावत जी हमारे वरिष्ठ नेता हैं। चुनाव में उनकी बहुत बड़ी जिम्मेदारी होगी। मकसद सबका एक है, केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनाना।
सवाल- 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। टूटे मनोबल से पार्टी का कार्यकर्ता कितना उबर पाया है?
जवाब- देखिए, कांग्रेस पहली बार नहीं हारी है। अपने गौरवशाली इतिहास में हार के बाद पार्टी ने हमेशा दमदार वापसी की है। थराली उपचुनाव हो या फिर नगर निकाय चुनाव, हमारे प्रदर्शन ने साबित किया है कि हम भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार हैं।
सवाल- आप केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर रहे हैं और चुनाव में माहौल राष्ट्रवाद का बन रहा है। कैसे सामना करेंगे इसका?
जवाब-आप कोई भी चुनाव उठाकर देख लीजिए। भाजपा विकास के मुद्दे से भागती है और भावनात्मक मसलों को उछालती है। इस वक्त भी वह शहीदों की शहादत पर राजनीतिक रोटियां सेंक रही है। महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, किसानों की कर्ज माफी, बकाया भुगतान, अच्छे दिन जैसे उसके तमाम वायदे आज हवा हो गए हैं। जनता को भाजपा इतना बेवकूफ न समझे। जनता चुनाव में भाजपा को धूल चटा देगी।