बता दें कि निर्दलीय चुनाव लड़ रहे देहरादून निवासी मनीष वर्मा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि डॉ. निशंक ने नामांकन के साथ दिए गए हलफनामे में बतौर पूर्व मुख्यमंत्री मिले सरकारी आवास और अन्य सुविधाओं के बकाए को लेकर तथ्य छिपाया है।
निशंक ने अपनी बेटी के बैंक खातों का उल्लेख नहीं किया है। निशंक ने दिल्ली स्थित सांसद आवास का प्रोवीजनल सर्टिफिकेट लगाया है। इसकी निर्वाचन अधिकारी से भी शिकायत की गई, लेकिन निशंक ने वहां अपने जवाब में कहा कि उनकी बेटी उन पर निर्भर नहीं है। वे अभी भी सांसद हैं।