पूर्व कैबिनेट मंत्री केदार सिंह फोनिया ने 2012 के विधानसभा चुनाव में टिकट काटे जाने के बाद भाजपा छोड़ दी थी। पार्टी ने बदरीनाथ सीट से प्रेमबल्लभ भट्ट को प्रत्याशी बनाया था। फोनिया ने उत्तराखंड रक्षा मोर्चा से चुनाव लड़ा और हार गए। उसके बाद वे आम आदमी पार्टी के साथ जुड़ गए। 2014 में फोनिया ने कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़े डॉ. हरक सिंह रावत के समर्थन में खंडूड़ी के खिलाफ प्रचार किया था।
प्रदेश में आम आदमी पार्टी चूंकि कोई वजूद नहीं बना पाई, लिहाजा फोनिया भी राजनीतिक परिदृश्य से गायब हो गए। इस बीच उनकी एक पुस्तक आई, जिसमें उन्होंने भाजपा की जमकर आलोचना की। फोनिया बदरीनाथ से तीन बार विधायक रहे। यूपी और भाजपा की अंतरिम सरकार में मंत्री रहे। 2007 में निर्वाचित होने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी के मंत्रिमंडल में उन्हें जगह नहीं मिली। इसे उनकी खंडूड़ी से नाराजगी की प्रमुख वजह माना जाता है।
मोदी से प्रभावित, खंडूड़ी ने छल किया
भाजपा में आने की वजह पूछी तो फोनिया ने कहा कि वे भाजपा से गए कहां। वे भाजपा में ही थे। उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ की। कहा, इस मुल्क को आगे बढ़ाने के लिए यदि कोई शक्ति है, तो वह मोदी की शक्ति है। मोदी सरकार ने बहुत काम किए। जनरल बीसी खंडूड़ी के बेटे के कांग्रेस से चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि खंडूड़ी जी ने भाजपा के साथ कपट छल किया है।