उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव के इतिहास की बात करें, तो ऐसा नहीं है कि कांग्रेस का प्रदर्शन हमेशा खराब रहा है। उत्तराखंड में भाजपा की सरकार रहते हुए 2009 के चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा का यहां सूपड़ा साफ कर दिया था। तब पांचों सीट पर कांग्रेस जीती थी। इससे पहले, 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ एक सीट पर विजय हासिल हुई थी, तब भाजपा के हिस्से तीन सीटें आई थीं। जबकि एक सीट सपा को मिली थी।
कांग्रेस की मुख्य ताकत
उत्तराखंड के भीतर कांग्रेस का भले ही संगठनात्मक ढांचा वर्तमान में कमजोर है, लेकिन उसकी सबसे बड़ी ताकत उसका कैडर है। नब्बे के दशक में भाजपा के उत्तराखंड में कदम पड़ने से पहले यहां कांग्रेस का ही राज रहा है। उसका कैडर गांव-गांव, गली-गली मौजूद है। यही वजह है कि कांग्रेस की सीटें भले ही कम हुई हों, लेकिन उसका वोट प्रतिशत हर चुनाव में लगभग स्थिर रहा है। इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकार की तमाम विफलताएं गिनाने के लिए उसके पास मौजूद हैं।
लोकसभा चुनाव को लेकर हमारी पूरी तैयारी है। भले ही कांग्रेस पूर्व में हारी हो, लेकिन मोदी सरकार का पांच और त्रिवेंद्र सरकार का दो साल का कार्यकाल जनता ने देख लिया है। घोर विफलता और नाकामी से भरा ये समय रहा है। जनता के सहयोग से कांग्रेस इस चुनाव में भाजपा को उखाड़ फेंकेगी।
- प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड कांग्रेस