जो उन्हें जानते हैं, वे जरूर सम्मान करते हैं। उनका कहना था कि आज के दौर में राजनीति की परिभाषा बदल गई है। वह 1968 में यूथ कांग्रेस से जुड़े थे। 1971 में 18 साल की उम्र होने पर संगठन में चले गए।
इसी उम्र में महज 12 रुपए खर्च कर ग्राम प्रधान पद का चुनाव लड़ा था। चुनाव जीतने के बाद उनके समर्थकों ने गुड़ की भेली बांट कर खुशी मनाई थी। इसके बाद वह उत्तर प्रदेश की विधानसभा में बागेश्वर से 1993 में पहली बार विधायक बने।
इसके बाद वे राज्य गठन के बाद 2002 में इसी सीट से दोबारा विधायक बने तो उत्तराखंड की पहली निर्वाचित सरकार में वह समाज कल्याण मंत्री बने और मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के साथ 2007 तक मंत्री रहे। उनका कहना था कि समाजसेवा की धुन इस कदर रही कि उन्होंने अपने लिए कुछ नहीं किया।