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कांग्रेस में घमासान, हरीश रावत का टिकट कटने की सूचना पर विधायकों ने दिल्ली में डेरा डाला

Sat, 23 Mar 2019 09:47 PM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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लोकसभा के चुनावी महासंग्राम में उतरने से पहले ही कांग्रेस में घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत का टिकट काटे जाने की सूचना पर उनके समर्थक सात विधायकों के साथ दिल्ली में डेरा डाल चुके हैं, ऐसी खबर है।

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इन विधायकों ने दिल्ली में हरीश रावत से मुलाकात की और अपनी भावनाओं से अवगत कराया। विधायकों ने अपनी पार्टी के ही कुछ वरिष्ठ नेताओं पर आरोप लगाया है कि वह भाजपा के साथ मिलकर चुनाव में कांग्रेस की संभावनाओं को खत्म करना चाहते हैं। इसी वजह से हरीश रावत का टिकट काटने की तैयारी कर ली गई है। खबर लिखे जाने तक ये विधायक पार्टी के राष्ट्रीय मुख्य महासचिव केएस वेणुगोपाल से मुलाकात के लिए पहुंच गए थे।

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कांग्रेस की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी की बैठक शुरू

दूसरी तरफ, कांग्रेस की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी की बैठक भी शुरू हो गई थी। बैठक में कांग्रेस के उम्मीदवारों पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है। 

लोकसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के लिए सिर्फ एक दिन शेष रह गया है। मगर, आपसी लड़ाई में उलझी कांग्रेस एक भी उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं कर पाई है। पौड़ी गढ़वाल से मनीष खंडूड़ी, टिहरी से प्रीतम सिंह और अल्मोड़ा से प्रदीप टम्टा को हाईकमान ने स्पष्ट संकेत करके चुनाव की तैयारी में जुटने के लिए कह दिया हैं। हरिद्वार और नैनीताल सीट की गुत्थी फिलहाल बुरी तरह उलझ गई है।
 

उम्मीदवारों से जुड़ा गणित शनिवार को बदल गया

दरअसल, इन दो सीटों पर उम्मीदवारों से जुड़ा गणित शनिवार को एकदम बदल गया। इससे पहले शुक्रवार शाम को हरीश रावत के नैनीताल सीट से टिकट पर मुहर लग गई थी। पहले हरिद्वार से रावत को टिकट दिया जा रहा था, लेकिन बाद में उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए नैनीताल से उन्हें चुनाव में उतारने पर हाईकमान ने सहमति जता दी थी।

शनिवार को सुबह यह खबर तेजी से फैली कि कांग्रेस के कुछ नेताओं के दबाव के चलते हरीश रावत का टिकट काट दिया है। इस पर हरीश रावत समर्थक विधायकों की नाराजगी सामने आ गई। सूत्रों के अनुसार इन विधायकों के निशाने पर प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह, प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश बताए जा रहे हैं। शनिवार दोपहर तक सात विधायकों के दिल्ली पहुंचने की खबर सामने आ गई।

जिन विधायकों के दिल्ली में होने की सूचना मिल रही है, उनमें पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल, उपनेता प्रतिपक्ष करन माहरा, मनोज रावत, हरीश धामी, आदेश चौहान, ममता राकेश, फुरकान अहमद शामिल बताए जा रहे हैं। हाल ही में राष्ट्रीय सचिव संगठन बनाए मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन पहले से ही दिल्ली में थे। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत से इन विधायकों की मुलाकात हुई है। हरीश रावत ने विधायकों से हाईकमान के फैसले के सम्मान करने के लिए कहा है, जबकि विधायकों का कहना है कि कांग्रेस को कमजोर करने वाले पार्टी नेताओं को वे बेनकाब करने की मांग हाईकमान से करेंगे।

हम सात विधायक इस समय दिल्ली में हैं। हमारे कुछ नेताओं ने पार्टी को कमजोर करने और भाजपा को फायदा पहुंचाने का कुचक्र रचा है। सबसे मजबूत प्रत्याशी हरीश रावत ही साबित हो सकते हैं, लेकिन हमें सूचना मिली है कि उनका टिकट काटा जा रहा है। यह पार्टी के हित में नहीं होगा। साजिश करने वाले नेताओं की सच्चाई हम हाईकमान के सामने रखेंगे। पुरोला विधायक राजकुमार, देरी की वजह से हमारे साथ दिल्ली नहीं आ पाए, लेकिन उन्होंने हमारे मुद्दे पर अपना समर्थन प्रकट किया है।
-करन माहरा, उपनेता प्रतिपक्ष/रानीखेत के कांग्रेस विधायक

मतभेद या गुटबाजी जैसी बातों में कोई सच्चाई नहीं है। हरीश रावत जी हमारे वरिष्ठ नेता हैं। उनके पास असम का भी प्रभार है, जहां उत्तराखंड के साथ ही पहले चरण में मतदान होना है। ऐसे में हाईकमान उनके टिकट को लेकर गंभीरता से विचार कर रहा है। विचार इस बात पर चल रहा है कि हरीश रावत खुद चुनाव लडे़ंगे या फिर असम में प्रभारी का दायित्व निभाएंगे। कांग्रेस पूरी तरह से एकजुट है और भाजपा को उखाड़ फेंकने के लिए पूरी तरह से तैयार है। लोकसभा चुनाव में हमारा अच्छा प्रदर्शन होगा।
-अनुग्रह नारायण सिंह, प्रदेश प्रभारी, कांग्रेस
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हरीश रावत के मैदान में उतरने से पहले हमले शुरू

कांग्रेस ने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है पर भाजपा ने कांग्रेस के पूर्व सीएम हरीश रावत पर हमला बोलना शुरू कर दिया है। कुमाऊं में चुनाव प्रचार का शंखनाद करने हल्द्वानी पहुंचे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पूर्व सीएम हरीश रावत पर जोरदार हमला बोला। कहा कि हरीश रावत का हारने का रिकॉर्ड ज्यादा है। वह मुख्यमंत्री रहते हुए भी विधानसभा चुनाव में दो-दो सीटों से हार गए थे।

उन्होंने कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस में प्रत्याशियों का अभाव हो गया है। उनके बड़े-बड़े नेता साहस नहीं कर पा रहे है कि कैसे चुनाव लड़े। जगह बदलने की भी सोच रहे हैं। यह भाजपा की संगठनात्मक शक्ति का नतीजा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि जब मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार थी, तो सदन से लेकर सड़क तक संघर्ष किया गया। उनके समय के मामलों को उठाया था, जिस पर एसआईटी गठित हुई।
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